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परमात्मा ही आत्मा का पति है : विनोद कृष्ण शास्त्री

बेगमगंज| बरखुआ गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने कथा का वाचन करते...

Danik Bhaskar | Feb 11, 2018, 02:15 AM IST
बेगमगंज| बरखुआ गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक पं. विनोद कृष्ण शास्त्री ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण के 16108 विवाह हुए इसमें भी लगन के माध्यम से आठ पटरानियां प्राकृतिक है। भूमि, जल,अग्नि, वायु आकाश मन बुद्धि अंहकार और सौ उपनिषद है। 16000 उपासना खंड की ऋचा है। यह ही भगवान की प|ियां है। इन्हें भी सबसे पहले लगन लगी। इसके बाद विवाह हुआ। पति बनने के पहले विवाह होता है तो पहले लगल नगती है।

भगवान के मिलन की लगन ही जीवन की सार्थकता है। लगन लगाकर हनुमान जी ने समुद्र लांगा, नल-नील ने पत्थर जल में लहराए, राक्षस कुल में उत्पन्न भक्त प्रहलाद ने खंभे से नरसिंह भगवान प्रकट किए। विभीषण ने श्री राम को पाया। सदकुल में जन्मी शबरी ने पक्षी जाती गीधराज जटायु ने हाथी यज्ञ में विदुर जी ने मीरा ने हरि लगन लगाई और परमात्मा को अपना पति स्वामी बनाया। हमें भी अपने जीवन में परमात्मा से मिलन की लगन लगाना चाहिए, क्योंकि परमात्मा ही हमारी आत्मा का सच्चा पति है।