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मध्यस्थता से हुए समझौतों में दोनों पक्षों की होती है जीत: न्यायाधीश बलरामसिंह

बेगमगंज| मध्यस्थता सुलह कि वह गोपनीय, सस्ती, अनौपचारिक, किफायती प्रक्रिया है जिसमें मध्यस्थ, तटस्थ, निष्पक्ष होकर...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 03:10 AM IST
बेगमगंज| मध्यस्थता सुलह कि वह गोपनीय, सस्ती, अनौपचारिक, किफायती प्रक्रिया है जिसमें मध्यस्थ, तटस्थ, निष्पक्ष होकर गोपनीय तथ्यों को गोपनीय रखते हुए विवाद को हल करने का आधार भूत रास्ता उपलब्ध कराती है। इसमें दोनों पक्षकारों की जीत होती है। कोई भी पक्षकार अपने को हारा हुआ महसूस नहीं करता है।

यह बात विधिक सेवा समिति द्वारा न्यायालय परिसर में आयोजित मध्यस्थता विधिक साक्षरता शिविर में द्वितीय जिला अपर सत्र न्यायाधीश बलराम सिंह यादव ने कही। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता बातचीत की एक प्रक्रिया है जिसमें एक निष्पक्ष मध्यस्थता अधिकारी विवाद और झगड़े में लिप्त पक्षे के बीच सुलह कराने में मदद करता है। मध्यस्थता विवादों को निपटाने के लिए मुकदमेबाजी की तुलना में कहीं अधिक संतोषजनक तरीका है। जिसके माध्यम से निपटाए गए मामलों में अपील और पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं होती है और सभी विवाद पूरी तरह निपट जाते हैं। इस पद्धति द्वारा विवादों का जल्द से जल्द निपटारा होता है जो कि खर्च रहित है। यह मुकदमों के झंझटों से मुक्त है । साथ ही साथ न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों का बोझ भी कम होता है।

शिविर की अध्यक्षता तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं प्रथम जिला अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने की। व्यवहार न्यायाधीश आशीष परसाई भी शिविर में शामिल हुए। शिविर के शुरू में वरिष्ठ अभिभाषक मो. मतीन सिद्दीकी ने भी मध्यस्थता विषय पर उद्बोधन देते हुए कहा कि मध्यस्थता विवादों को निपटाने की सरल एवं निष्पक्ष आधुनिक प्रक्रिया है। एजीपी बद्री विशाल गुप्ता ने संचालन करते हुए मध्यस्थता विषय पर सारगर्भित उद्बोधन देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पक्षकारों के अलावा, वरिष्ठ अभिभाषक शिवराजसिंह ठाकुर, गजेंद्रसिंह ठाकुर, राजकुमार गुप्ता, श्याम रावत, गुफरान अली आदि मौजूद थे।