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बसों में किराया सूची है न फिटनेस संचालक मनमाना वसूल रहे किराया

परिवहन कार्यालय में अमले की कमी का निजी यात्री बस संचालक भरपूर लाभ उठा रहे हैं। यही कारण है कि बदहाल यात्री बसें...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 03:10 AM IST
परिवहन कार्यालय में अमले की कमी का निजी यात्री बस संचालक भरपूर लाभ उठा रहे हैं। यही कारण है कि बदहाल यात्री बसें नियमों की अनदेखी कर सड़काें पर दौड़ रहीं हैं। लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बसों में किराया सूची भी नदारद रहती है जिसके कारण यात्रियों की कंडेक्टर से कहा सुनी होना आम बात हो गई है।

खटारा यात्री बसों में बदहाल सड़कों पर यात्रा करना जान जोखिम में डालने के बराबर है। यात्रियों की मजबूरी है कि वे इन स्थितियों में ही यात्रा करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी सलामती की प्रार्थना करते हुए ही खटारा बसों में सवार होते हैं। नगर से दर्जनों यात्री बसें अलग अलग मार्गो के लिए निकलती हैं इनमें सैकड़ों यात्री यात्रा करते हैं। बसों में इमरजेंसी गेट दिख रहे होते हैं, लेकिन इमरजेंसी तो दूर सामान्य स्थिति में भी इन्हें खोलना मुमकिन नहीं है । कई बसों की फिटनेस ठीक नहीं है। बस स्टैंड पर खड़ी बसें दिखाते हुए शानू शिल्पकार ने बताया कि इनमें यात्रा करना खतरे से खाली नहीं होता।

किसी भी बस में किराया सूची प्रदर्शित नहीं हैं। इसके वास्तविक किराए को लेकर कंडेक्टर से झड़प होती रहती है। बसों में अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं है।

यात्री बसों में की जा रही नियमों की अनदेखी

नियमानुसार यह होना जरूरी

यात्री रामविशाल लोधी, जयकुमार जैन, राकेश सेन, अजहर खां,सौरभ यादव आदि का कहना है कि सभी बसों की फिटनेस, बीमा की जांच होनी चाहिए और इस बारे में जानकारी बस के आगे कांच पर प्रदर्शित हो। बसों में इमरजेंसी गेट चालू हालत में होना चाहिए। फस्टएड बाॅक्स में आवश्यक दवाएं भी हो। बसों पर चलने वाला स्टाफ निर्धारित ड्रेस में हो और नेम प्लेट लगी होना चाहिए। बसों मे अग्निशमन यंत्र लगा हो। जिस रूट की बस है उसमें उस रूट की किराया सूची चस्पा होना चाहिए।

सूची चस्पा नहीं हुई तो की जाएगी कार्रवाई


जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं अधिकारी

नियम विरुद्ध दौड़ रही बसों के बारे में परिवहन अधिकारी हर बार एक ही जवाब देते हैं कि हम दिखवाते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं किया जाता। वहीं डीजल के दाम बढ़ने का हवाला देकर कंडक्टर यात्रियों को अधिक किराया वसूलने लगे हैं। जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिक किराया न देने पर यात्रियों को बस से उतार दिया जाता है।