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बच्चे स्कूल जाने लगे, अब तक नहीं मिली मातृत्व सुरक्षा राशि

प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना लागू कर तो दी गई है, लेकिन हकीकत में यह सुरक्षा किसी भी गर्भवती महिला को नहीं...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:10 AM IST
बच्चे स्कूल जाने लगे, अब तक नहीं मिली मातृत्व सुरक्षा राशि
प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना लागू कर तो दी गई है, लेकिन हकीकत में यह सुरक्षा किसी भी गर्भवती महिला को नहीं मिल रही है। तहसील में करीब एक हजार महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें सुरक्षा राशि की किस्तें मिल ही नहीं रही हैं। कारण यह है कि पहले महिला बाल विकास विभाग के पास यह योजन थी उसके बाद स्वास्थ्य विभाग को यह योजना दे दी गई, लेकिन आज तक इसके लिए बजट ही नहीं भेजा गया है। फिलहाल अधिकारी हितग्राहियों को सिर्फ झूठे आश्वासन दे रहे है कि राशि आते ही आपको प्रदान की जाएगी। 1 जनवरी 2017 से इस योजना को पूरे देश में लागू किया गया है, लेकिन बेगमगंज तहसील ऐसी पिछड़ी तहसील है कि तब से लेकर अब तक एक भी हितग्राही को राशि नहीं मिली है।

योजना

तहसील में एक हजार महिलाओं को नहीं मिल रहीं सुरक्षा राशि की किस्तें, गर्भावस्था में मिलनी थी मदद

तीन बार बदली योजना पर हितग्राहियों को कोई फायदा नहीं

वर्ष 2011 के लगभग मातृत्व इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोगिनी योजना केना से यह योजना प्रदेश में सागर और छिंदवाड़ा दो जिलों में शुरू की गई थी। तब 4 हजार रुपए मदद के रूप में तीन किस्तों में गर्भवती महिला को मिलते थे। 2014 में राशि बढ़ाकर 2 किस्तों में 6 हजार रुपए कर दी गई। जनवरी 2017 में यह घटाकर 3 किस्तों में 5 हजार रुपए हो गई। यह भी कहा गया कि अब दो की जगह सिर्फ एक डिलेवरी में ही मदद मिलेगी। योजना का नाम और प्रकार भले ही बदला हो लेकिन हितग्राहियों को इससे कोई फायदा नहीं हुआ। उल्टा वह उलझ कर रह गए हैं।

यह हो रहे परेशान

तहसील की सभी 60 पंचायतों में हितग्राही परेशान हैं इनकी संख्या लगभग एक हजार है। करीब 200 अधिक सीएम हेल्प लाइन पर शिकायतें इसी से संबंधित हैं। बावजूद इसके हितग्राहियों को किस्तें नहीं मिल पाई है। सुनवाहा गांव की दशोदा पति कमल सिंह की बेटी गायत्री 3 साल की हो गई लेकिन उसे अभी तक एक भी किस्त नहीं मिली। वह कई बार महिला बाल विकास तो एक साल से सिविल अस्पताल के चक्कर लगा रही है। इसी प्रकार फीरोज पति नवेद का बेटा मुसैफ भी चार साल का हो गया। सरिता पति उमा शरण की बेटी माही तो स्कूल जाने लगी है लेकिन उन्हें अब तक एक भी किस्त नहीं मिली है।

सब भोपाल से होना है


नहीं मिला बजट


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