--Advertisement--

क्षेत्र में घूमकर देखें कि कहीं बाल विवाह न हो

आदिवासी समाज में इन दिनों शादी-विवाह का दौर चल रहा है। आदिवासी समाज के लोग जानकारी के अभाव में नाबालिगों की शादी कर...

Danik Bhaskar | Mar 20, 2018, 03:10 AM IST
आदिवासी समाज में इन दिनों शादी-विवाह का दौर चल रहा है। आदिवासी समाज के लोग जानकारी के अभाव में नाबालिगों की शादी कर देते हैं इसलिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं से कहा गया है कि यदि गांव में कहीं भी नाबालिग की शादी हो रही है तो तत्काल सूचना दें। पहले माता-पिता को समझाया जाएगा। यदि नहीं माने तो फिर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चूंकि आदिवासी क्षेत्रों में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा रही है, लिहाजा मैदानी अमले के जरिए शादी वाले परिवारों में समझाइश दी जा रही है कि बाल विवाह न होने दें।

सभी पर्यवेक्षकों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को दायित्व सौंपा है कि वे अपने क्षेत्र में भ्रमण कर होने वाले विवाह समारोह पर नजर रखें। जहां भी बाल विवाह की स्थिति नजर आए, उस शादी को तत्काल रुकवाएं। लाडो अभियान के तहत बनी समिति सदस्यों को भी कहा गया है कि गांव में कहीं कोई बाल विवाह हो रहा हो तो इसकी सूचना अधिकारियों को दें।

अच्छी पहल

आदिवासी समाज में शादियां होने से बाल विवाह पर नजर रखने मैदानी अमला अलर्ट, शुरू किया अभियान

कार्यकर्ता सहायिकाओं को नजर रखने के निर्देश

महिला बाल विकास अधिकारी प्रेमबाई पंथी ने बताया कि बाल विवाह पर पूरी तरह से रोकथाम के लिए तैयारी की गई है। सभी पर्यवेक्षक व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को इसके लिए अलर्ट रहने को कहा गया है। आदिवासियों के अलावा अन्य समाजों में होने वाली शादियों पर भी नजर रखने के लिए कहा गया है ताकि बाल विवाह को रोका जा सके।

बाल विवाह क्यों नहीं

सरकार ने कन्याओं की शादी की उम्र 18 वर्ष तय की है। कम उम्र में बालिकाओं की शादी से उनका शारीरिक मानसिक विकास नहीं होता है। बालिका की शिक्षा-दीक्षा अधूरी रह जाती है। इसके चलते जीवन आगे उसे परेशानी का सामना करना पड़ता है। कम उम्र में शादी होने पर बच्चे भी जल्दी हो जाते हैं। चूंकि मां का पूर्ण विकास नहीं होता, इस कारण बच्चे का भी विकास नहीं हो पाता। मां भी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाती है। समय से पूर्व बालिका घर-परिवार की जिम्मेदारी में बंध जाती है। इस कारण वह अपना जीवन सही ढंग से नहीं जी पाती।