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रामचरित मानस के पात्र निष्कलंक: उपाध्याय

मानव जीवन दुर्लभ है यह जीवन लजाने के लिए नहीं सजाने के लिए हैं रामजी एवं रामजी के सहयोगी परिवार के सदस्य सभी...

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 03:25 AM IST
मानव जीवन दुर्लभ है यह जीवन लजाने के लिए नहीं सजाने के लिए हैं रामजी एवं रामजी के सहयोगी परिवार के सदस्य सभी निष्कलंक है। चरित्र ही मानव जीवन का आभूषण है इसके बिना श्रृंगार नहीं हो सकता। आज भी शबरी, गिद्ध, जटायु आदि का नाम सम्मान से लिया जाता है किंतु रावण जिसके पास धन विद्या बल का भंडार था उसके बावजूद उसे उसके कुकर्मों के कारण जलाया जाता है। उक्त उदगार जनपद पंचायत में चल रही श्रीराम कथा में विद्या वाचस्पति आचार्य डा. रामाधार उपाध्याय ने व्यक्त किए। उन्होंने लोगो से कहा कि धर्मपूर्वक जीवन ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है चरित्र ही मूल्यवान धन है इसे सहेजे और धर्म पर चलकर अपना जीवन सार्थक करें।

पं. राजेन्द्र पाठक ने कहा कि कौशल्या माता जैसी माता आज तक भूमंडल पर नहीं दिख सकी। वह सौत कि जिसके पति को पुत्र से वंचित कर दिया वह कैकेयी के पुत्र को ह्रदय से लगातार ह्रदय दूध से सिंचित कर रही हैं । जिन माता को अपने पुत्र तथा कैकेयी के पुत्र में कोई भेद नहीं देखती। ऐसी विशपल दृष्टि ही माता की मातृता सिद्ध कर रही है।

पं. सुरेन्द्र मिश्रा ने हनुमान जी के पावन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि हनुमान में बड़े होने तथा छोटे होने की कला है। वे पूर्वाग्रह ग्रस्त नहीं रहेते । लक्ष्मण जी रामजी के पास रहकर सेवा कर सकते है किंतु दूर जाकर सेवा कार्य नहीं कर सकते। किंतु हनुमान जी चरण में रहकर भी रामजी की सेवा करते है। यदि दूर भेज देते है तो लंका में जाकर भी रामराज पूर्ण कर देते है। रामायण जी, मारूति जी गोपाल ने हनुमान के समान कोई बड़भागी नहीं है। ये रामराज परोपकार तथा सभी की सेवा में संलग्न रहते है। अत वे रामजी के कृपा पात्र है। बड़भागी है। कथा के अंत में मानस सम्मेलन समिति के अध्यक्ष माधोसिंह पटेल ने सभी वक्ता तथा श्रोताओं का अभिनंदन किया।

कथा

जनपद पंचायत में चल रही श्रीराम कथा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं श्रद्धालु

कथा वाचक रामाधर शर्मा के प्रवचन सुनते श्रद्धालु।