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मेधा पाटकर ने लिखा सीएम को पत्र, कहा-बेगमगंज को हरसूद नहीं बनने देंगे

जिले की सीमा पर करोड़ों की लागत से बनने वाली बीना बहुउद्देशीय संयुक्त सिंचाई परियोजना को लेकर मेधा पाटकर ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 13, 2018, 04:15 AM IST

मेधा पाटकर ने लिखा सीएम को पत्र, कहा-बेगमगंज को हरसूद नहीं बनने देंगे
जिले की सीमा पर करोड़ों की लागत से बनने वाली बीना बहुउद्देशीय संयुक्त सिंचाई परियोजना को लेकर मेधा पाटकर ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर पूछा है कि जब ढाडिया हरदोट की 20 एकड़ भूमि बीना परियोजना में डूब क्षेत्र में आ रही है तो फिर बेगमगंज डूबने से कैसे बच सकता है। उन्होंने पत्र में मुख्यमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है, क्योंकि बड़वानी व हरसूद में भी इसी तरह वहां के निवासियों को भरोसा दिलाया था कि वे डूब में नहीं हैं और बाद में उक्त शहर डूब गए। सुश्री मेधा पाटकर ने उक्त पत्र 18 जनवरी को मुख्यमंत्री को भेजा है, जिसका जवाब अभी तक उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। क्षेत्र के कई लोग किसान नेता सुश्री मेधा पाटकर से मिलकर स्थिति से अवगत करा चुके है और बेगमगंज आने का आमंत्रण दे चुके हैं। सुश्री मेधा पाटकर मार्च माह में बेगमगंज आकर पूर्ण रूप से डूब में आ रहे ककुआ ब. गढ़ी, चांदामऊ और खिरिया पाराशर के किसानों से मुलाकात कर आंदोलन की रूपरेखा बनाएंगी।

घिर रहा है बेगमगंज : खेजड़ा, सेमरा,कोलुआ, देवलापुर, मढि़या निवारी, बेरखेड़ी टप्पा सुनेहरा, रहटवास,मढि़या सेतु, परसौरा, सलैया, सुनेहरा, भुरेरू, कसवा चौका जो कि सागर भोपाल सड़क से पूर्व की ओर चार किमी दूर है। एक तरफ कोलुआ खेजड़ा सुनेहरा, देवलापुर की तरफ से बेगमगंज घिर रहा है।

डूबेगा करीब 16 किमी का मार्ग : ककरूआ के आसपास एक स्टाप डेम के लिए जगह तलाश की जा रही है। खिरिया पाराशर जो पूरी तरह डूब में है से लेकर परासरी होते हुए मढि़या गांव से आगे तक तो धसान नदी पर बनने वाले बांध पर भी सड़क डूब में आ रही है दोनों ही जगह करीब 16 किमी का मार्ग डूब में बताया जा रहा है।

मेघा पाटकर ने यह किए सवाल

मेघा पाटकर ने सवाल किए है कि जुलाई 17 में समाचार पत्रों के माध्यम से कहा गया था कि मढि़या बांध की ऊंचाई कम कर दी है जिससे अब 32 के स्थान पर 8 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी। कुल 69 ग्रामों के स्थान पर 31 ग्राम डूब में आएंगे। मढ़िया बांध में 310 के स्थान पर 85 एमसीएम पानी स्टोरेज किया जाएगा। लेकिन बाद में जनवरी 2018 में तहसील से बेगमगंज तहसील के 38 व गैरतगंज तहसील के 3 ग्रामों की कृषि भूमि की जानकारी जल संसाधन विभाग ने मांगी। और 31 जनवरी को तहसीलदार बेगमगंज ने 37 गांवों की भूमि की सूची सौंपी। जिसमें सवा तीन हजार कृषि भूमि आदि डूबने की बात कही गई। आखिरकार जल संसाधन विभाग सागर बार बार अपनी बात से क्यों पलट रहा है।

सागर जिले के राहतगढ़ में हुई अधिसूचना जारी, अब बेगमगंज की बारी

जिले के डूब प्रभावित ग्राम परासरी व गावरी में जल संसाधन विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए वहां की भूमि की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। डूब प्रभावित भूमि के मुआवजे के दस्तावेज तैयार हो रहे हैं। वहां के नक्शे में विभाग ने लाल रंग की लाइन से डूब प्रभावित जमीन को रेखांकित कर दिया है। बेगमगंज तहसील के नक्शे खसरा खतौनी क्षेत्रफल आदि की जानकारी जल संसाधन विभाग के पास 31 जनवरी को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में तहसीलदार आरके सिंह सौंप चुके हैं। जिसमें 37 ग्रामों की कृषि भूमि व राजस्व एवं वन भूमि 15276.386 हेक्टेयर में से करीब 3250 हेक्टेयर किसानों की कृषि भूमि व रहवासी भूमि डूब में आने की जानकारी दी गई है। जिस पर भी करीब एक सप्ताह में जल संसाधन विभाग नक्शे पर लाल लाइन लगाकर भेजने वाला है जिसके आते ही यहां भी अधिसूचना जारी की जाएगी ताकि किसी भी भूमि की खरीद फरोख्त न हो सके।

मार्च में मेधा पाटकर का दौरा

डा. सुनीलम के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मुलताई के पूर्व विधायक किसान नेता डा. सुनीलम एवं मेधा पाटकर यदि मुख्यमंत्री बांध की सही जानकारी आम नहीं करते है तो मार्च माह में बेगमगंज आकर किसानों के साथ आंदोलन की रूपरेखा बनाएंगी। बेगमगंज तहसील के लोगों को बसाने के लिए जल संसाधन विभाग सागर ने राजस्व विभाग से 75 एकड़ भूमि कालोनी बनाने के लिए मांगी है। इस संबंध में तहसीलदार आरके सिंह ने बताया कि बीना बांध के डूब क्षेत्र में प्रभावित रहवासियों को बसाने के लिए जल संसाधन विभाग सागर ने 30 हेक्टेयर भूमि की मांग की है।

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