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पिछले साल पानी भरने में हुईं थी 22 लोगों की मौत

भास्कर संवाददाता|सुल्तानगंज क्षेत्र में जल संकट ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। पिछले साल करीब 22 लोगों ने पानी...

Danik Bhaskar | Mar 16, 2018, 04:15 AM IST
भास्कर संवाददाता|सुल्तानगंज

क्षेत्र में जल संकट ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। पिछले साल करीब 22 लोगों ने पानी भरने में ही अपनी जान गंवा दी थी। क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग कुओं, तालाब व अन्य जल स्रोतों से पानी भरते हैं। इस दौरान हादसों में उन्हें जान गंवानी पड़ती है। लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है। क्षेत्र की अधिकतर नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं। जिसके कारण ग्रामीणों को पारंपरिक जल स्रोतों का सहारा लेना पड़ता है।

वर्ष 2016-17 में पानी भरते समय गिरने से 22 महिला एवं पुरुषों की मौत हुई। क्षेत्र की अनेक नल जल योजना अधर में लटकी हैं और क्षेत्र के अनेक गांवों की नल जल योजना छोटी.छोटी खराबियों के चलते बंद हैं। ग्राम जसरथी उमरहरि आदि ग्राम में भी नल जल योजना बंद है। बेगमगंज तहसील में कुल 53 नल जल योजना हैं। जिनमें से 12 बंद हैं और आठ नल जल योजना मुख्यमंत्री योजना के अंतर्गत नई स्वीकृत की गई हैं और 6 अनुदान योजना के अंतर्गत स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक नई योजना अधर में लटकी हैं। वहीं तहसील में कुल 975 हैंडपंप हैं। जिनमें से करीब 100 से अधिक बंद हैं। दर्जनों हैंडपंपों पर एक ही परिवार का कब्जा होने के चलते ग्रामवासी पानी भरने नहीं जा पाते। इस वर्ष क्षेत्र सूखे की मार झेलने के कारण समय से ही पहले जल संकट से लोग जूट रहे हैं। पानी के लिए जमीनी स्तर पर काम नहीं किया गया तो गर्मी के दिनों गांवों में त्राहि-त्राहि मच सकती है। पानी से डूबने वाले मौतों की जानकारी देते हुए एएसआई मनोज धुर्वे ने बताया यह आंकड़ा जिले की 21 थानों में सर्वाधिक हो सकता है।

पीएचई एसडीओ बेगमगंज पंजाबराव टाटस्कर का कहना है 31 मार्च तक सभी पुरानी नल.जल योजना चालू की जाएंगी एवं नवीन योजनाओं के टेंडर होकर काम शुरू किए जाएंगे। वर्तमान में मढ़िया गुसाईं, टेकापार खुर्द, भजिया, गुलवाड़ा, सुनवाहा, मोईया, रेमा आदि में जल संकट शुरू हो गया है।

ग्रामीण क्षेत्र में पानी की किल्लत के कारण ग्रामीण परेशान।