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सत्संग से ही जीवन को बनाया जा सकता है सार्थक: विनोद शास्त्री

बेगमगंज| बरखुआ गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पं. विनोद शास्त्री ने कहा कि सत्संग से ही जीवन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 08, 2018, 04:20 AM IST

बेगमगंज| बरखुआ गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पं. विनोद शास्त्री ने कहा कि सत्संग से ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। जहां पर भी सत्संग हो, वहां पर लोगों को पहुंच कर उसका आनंद प्राप्त करना चाहिए। श्री शास्त्री ने कहा कि हिरण्यकश्यप जैसे दैत्य कुल में भक्त शिरोमणि प्रहलाद का जन्म हुआ। लेकिन यह सत्संग का ही प्रभाव है कि दैत्य हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को दैत्य विद्या सिखाने दैत्य गुरू संडामक के यहां भेजा, पर प्रहलाद ने दैत्य शिक्षा नहीं ली। क्योंकि प्रहलाद मां के गर्भ में थे तब मां ने देव ऋषि नारद जी के आश्रम में थी। तभी आश्रम में संतों का सत्संग मिला। उस समय सत्संग के प्रभाव से प्रहलाद भगवान नारायण के परम भक्त बन गए। यही कारण है कि प्रहलाद को प्रभु के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होने के साथ ही उच्च प्रभु का पद भी मिला। भागवत कथा के आयोजक अवधनारायण यादव द्वारा भागवत ग्रंथ की पूजा अर्चना की गई।

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