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कौरव मध्यस्थता स्वीकार कर लेते तो महाभारत न होती ः न्यायाधीश

विधिक सेवा समिति द्वारा मध्यस्थता शिविर का आयोजन किया गया बेगमगंज| श्रीकृष्ण ने भरसक प्रयास किया कि कौरवों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 28, 2018, 04:20 AM IST

विधिक सेवा समिति द्वारा मध्यस्थता शिविर का आयोजन किया गया

बेगमगंज| श्रीकृष्ण ने भरसक प्रयास किया कि कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध न हो वे समझौते का प्रस्ताव लेकर कौरवों के पास गए और पांडवों के लिए पांच गांव मांगें, लेकिन कौरव तैयार नहीं हुए और अंत युद्ध के माध्यम से हुआ। ऐसा ही श्रीराम रावण युद्ध का भी है। यदि मध्यस्थता को दोनों पक्ष मान लते तो रावण की यह दुर्गती न होती। इसलिए यहां जो भी पक्षकार है उन्हें चाहिए कि वे मध्यस्थता के माध्यम से अपने मामलों का पटाक्षेप कराए जो मामले राजीनामे योग्य है और कानून में जिन मामलों में राजीनामे का प्रावधान है।

उक्त उदगार तहसील विधिक सेवा समिति द्वारा मध्यस्थता जागरूकता शिविर में तहसील विधिक सेवा समिति अध्यक्ष एवं जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने व्यक्त किए। उन्होंने उपस्थित पक्षकारों को मध्यस्थता के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हमें महाभारत एवं श्रीराम रावण युद्ध से सबक लेना चाहिए और अपने मामलों में राजीनामा करके अदालतों में समय और पैसा नहीं गवाना चाहिए। राजीनामे से दोनों पक्षों की जीत होती है। शिविर को व्यवहार न्यायाधीश आशीष परसाई, अधिवक्ता एम मतीन सिद्दीकी, ओपी दुबे, एसके तिवारी एवं विधि अंतिम वर्ष के छात्र उद्धव गुप्ता ने भी संबोधित कर मध्यस्थता के बारे में विस्तार से बताया।

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