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पुरातत्व विभाग की अनदेखी से बेशकीमती धरोहर का क्षरण

नगर से सागर की ओर ग्राम बेरखेड़ी होते हुए मात्र 9 किमी दूर नेपाल से आए राजा सूर्य नरेश की नगरी कुंतलपुर जिसका बिगड़ा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 18, 2018, 05:15 AM IST

नगर से सागर की ओर ग्राम बेरखेड़ी होते हुए मात्र 9 किमी दूर नेपाल से आए राजा सूर्य नरेश की नगरी कुंतलपुर जिसका बिगड़ा नाम कोकलपुर है। इसमें प्रवेश करते ही छह इंच से लेकर चार फीट तक की मूर्तियों के दर्शन होते हैं। यहां पर राजा चंद्रहास और राजकुमारी विषया की गाथाएं हर गली चौराहे पर ग्रामवासियों की जुबान पर आज भी जीवित हैं। इसका वर्णन विश्राम सागर में संक्षिप्त रूप से एवं धार्मिक ग्रंथ जैमिनी पुराण में अध्याय 41 से 62 तक में विस्तारपूर्वक दिया हुआ है।

राजा चंद्रहास और उनके ससुर राजा सूर्य नरेश मंत्री दृष्टबुद्ध के समय बनवाई गई इन बेशकीमती कलाकृतियों को शासन प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग ने कभी सहेजने की पहल नहीं की। जिस कारण आज ये बर्बादी की कगार पर है। 126 एकड़ भूमि में फैला कुंतलपुर का क्षेत्र जिसमें 32 एकड़ का विशाल तालाब राजा सूर्य नरेश द्वारा बनवाया गया था। जिसके चार घाट ब्राहम्ण घाट, राज घाट, क्षत्रिय घाट एवं शूद्र घाट आज भी मौजूद है। तलाब का संरक्षण नहीं किए जाने से वह धीरे धीरे अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया।

इसी से लगा हुआ वह प्राचीन बरगद का वृक्ष भी है जहां राजा सूर्य नरेश आकर रुके थे। वहीं तलाब के किनारे ही रानी सती विषया का सिद्ध स्थान है। जहां आज भी लोग दूर दराज से आकर मनोकामनाएं पूर्ण कराते हैं। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को एक दिन का मेला लगता है। इस मेले की विशेषता है कि यहां कई क्विंटल मिठाई बिकने आती है और कोई भी व्यापारी बचाकर नहीं ले जाता। शाम ढलने से पहले ही सारी मिठाई बिक जाती है। मिठाई की कीमत भी कम होती है।

इन देवी-देवताओं की हैं प्रतिमाएं : गांव में मौजूद मूर्तियों में अधिकतर नागदेव महाराज, गणेशजी, सरस्वतीजी, नादिया, हनुमानजी, देवीजी, शंकरजी, नवदुर्गा, खेड़ापति मैया, इन्द्र जी तथा कुछ जैन धर्म से मिलती जुलती तथा दो शेरों की एवं सतियों की व विभिन्न मुद्राओं में तीर कमान खीचे हुए, सिर पर पहाड़ लिए हुए, नृत्य करते वीणा बजाते हुए आदि प्राचीन प्रतिमाएं मौजूद हैं।

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