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अब सोयाबीन के बढ़े दाम, किसानों को नुकसान

जिस भावांतर को किसानाें के लिए वरदान बताया जा रहा है, यह सिर्फ व्यापरियों के लिए मुनाफे की योजना साबित हुई है।...

Danik Bhaskar

Feb 25, 2018, 05:20 AM IST
जिस भावांतर को किसानाें के लिए वरदान बताया जा रहा है, यह सिर्फ व्यापरियों के लिए मुनाफे की योजना साबित हुई है। स्थिति यह है कि जब तक भावांतर लागू रही सोयाबीन के दाम एक बार ही 2950 रुपए प्रति क्विंटल को छू पाए। अधिकतर रेट 2900 रुपए प्रति क्विंटल ही रहा। भावांतर खत्म होते ही सोयाबीन 3800 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। उड़द में भी पहले के मुकाबले तेजी देखी जा रही है।

यानी मुनाफे के लिए व्यापारियों ने योजना लागू रहते जान बूझकर दाम गिराए। इस बीच चना मसूर को भी भावांतर में लेने की घोषणा के बाद से ही दोनों के रेट 150 से 250 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आ गए है। किसानों को आशंका है कि जब भावांतर से बिक्री शुरू होगी, तो इसके भी रेट और नीचे न चले जाएंगे। किसानों का कहना है कि भावांतर लागू होते ही व्यापारी ज्यादा दामों पर खरीदारी नहीं करते है। सरकार को यदि हमारी चिंता है तो समर्थन मूल्य पर खरीदी की अनिवार्यता सभी मंडी में करें। ठीक वैसे जैसे इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।

हालात

2950 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाले सोयाबीन के दाम अब 3800 रुपए प्रति क्विंटल हुए

ऐसे समझें भावांतर और योजना मुक्त बिकी का सीधा अंतर

सोयाबीन : भावांतर के समय सोयाबीन अक्टूबर माह में न्यूनतम 1900 से 2700 रुपए प्रति क्विंटल बिका। नवंबर में यह 1950 से 2840 और दिसम्बर में 1950 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका है। वहीं जनवरी में भावांतर खत्म होते ही न्यूनतम 2200 से लेकर 3800 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक्री हुई है। फरवरी में भी रेट यही बने हुए है।

उड़द : अक्टूबर में उड़द 1800 से 2900 रुपए, नवंबर में 1700से 3200 रुपए दिसंबर में 1700से 3200 रुपए तक बिकी। एक दिन रेट 3700 रुपए तक हुए। वहीं जनवरी में 1750 से 2900 रुपए और फरवरी माह में 1900 से 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका उड़द में न्यूनतम और अधिकतम दोनों दामों में 50 रुपए की तेजी है।

चना : जनवरी माह में 3150 से लेकर 3600 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका। 1 फरवरी को इसके रेट 3200 से 3675 तक रहे। इस बीच भावांतर की घोषणा हुई तो 10 फरवरी को रेट घटकर 3100 से 3500 रुपए तक आ गए।

मसूरः 16 जनवरी को इसके रेट 2900 से लेकर 300 रुपए प्रति क्विंटल तक बोले गए। 29 जनवरी को 2900 से 3270 तक मसूर बिकी। दामों में कमी आई और 10 फरवरी को यह 2675 से 3100 और 13 फरवरी को 2600 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल ही बिकी।

अधिकतम मूल्य किसी को नहीं मिला

भावांतर का फार्मूला यह है कि समर्थन मूल्य और किसान ने जिस भाव में उपज बेंची उसका अंतर और महाराष्ट्र और गुजरात में उस दिन के माॅडल विक्रय रेट में आए अंतर में जो भी न्यूनतम होगा वह किसान को दिया जाएगा। उदाहरण के लिए मंडी में सोयाबीन अधिकतम 3000 रुपए प्रति क्विंटल बिका और किसी किसान का सोयाबीन 2 हजार रुपए में ही बिक पाया और उस दिन का माॅडल रेट निकला 2500 रुपए तो किसान को एक हजार नहीं बल्कि 500 रुपए प्रति क्विंटल ही दिए गए। वहीं किसी ने उसी दिन बिक्री 2800 रुपए प्रति क्विंटल में तो उसे मात्र 200 रुपए प्रति क्विंटल ही मिले।

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