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धैर्यवान व्यक्ति सुख को प्राप्त करता है: शास्त्री

जो मानव भागवत महापुराण में वर्णित प्रसंगों के अनुसार जीवन यापन करता है। अपने जीवन को प्रभु के चरणों में अर्पित कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 17, 2018, 06:10 AM IST

धैर्यवान व्यक्ति सुख को प्राप्त करता है: शास्त्री
जो मानव भागवत महापुराण में वर्णित प्रसंगों के अनुसार जीवन यापन करता है। अपने जीवन को प्रभु के चरणों में अर्पित कर देता है। एेसा मानव बैकुंठ को प्राप्त होता है। बसुंधरा के प्रत्येक प्राणी को चाहिए कि वह भागवत कथा का श्रवण कर जीवन को धर्ममय बनाए।

यह उद्गार पंडित जगदीश प्रसाद शास्त्री ने व्यक्त किए। वह नगर के कांठिया मंदिर परिसर में आयोजित भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को भगवान की वाणी का रसा स्वादन करा रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन भागवती राजपूत द्वारा कराया जा रहा है। कथा के प्रारंभ में श्रद्धालुओं द्वारा व्यास गादी की पूजा अर्चना की गई। पंडित श्री शास्त्री ने बताया कि जो प्राणी संयमी, विवेकवान, धैर्यवान, ज्ञानी, दानी होते है ऐसे व्यक्ति जीवन में न केवल सुख व पुण्य को प्राप्त करते है अपितु जीवन में सात्विकता धारण कर ऊंचाइयों को छूते हैं।

उन्होंने सतयुग व कलयुग की विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि जहां तप, तपस्या, धर्म, आराधना, पूजन, हवन आदि धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। वहां कलयुग का वास नहीं होता। जबकि जहां पर पाप कषाय, मांस, मदिरा, अनाचार, अत्याचार आदि पाप होते हैं कलयुग का निवास होता है। अतः व्यक्ति को धर्म, पूजन, भक्ति, आराधना, साधु संतों की सेवा आदि धार्मिक अनुष्ठान करते रहना चाहिए।

धर्म

चौथे दिन जगदीश शास्त्री ने बताया बैकुंठ पहुंचने का मार्ग, कथा का श्रवण कर रहे श्रद्धालु

स्वार्थ से की गई मित्रता विवादों को देती जन्म

पंडित जगदीश प्रसाद शास्त्री ने कहा कि मित्रता निस्वार्थ व निष्कलंक होना चाहिए। हजारों वर्षों के बाद भी कृष्ण सुदामा के मित्रता के उदाहरण दिए जाते हैं। मित्रता में मित्र के साथ भेदभाव व द्वेषभाव नहीं होना चाहिए। स्वार्थ के चलते की गई मित्रता कभी भी सफल नहीं होती। बल्कि विवादों को जन्म देती है। मित्र कम बनाएं, लेकिन मित्र एेसे बनाए जाएं जो कि निस्वार्थ हो तथा संकट के समय सहयोगी की भूमिका निभाएं। गरीब, दीन, हीन, लाचार व्यक्ति की सेवा किए जाने को सर्वोपरि बताया।

60 पंचायतों के लिए 60 सर्वे दल गठित, टीमें गांवों में पहुंचकर कर रहीं ओलावृष्टि का सर्वे

तहसील में सर्वाधिक रहमा गांव में 80 प्रतिशत फसलें हुईं बर्बाद 6 मकानों को क्षति पहुंची है

भास्कर संवाददाता|बेगमगंज

क्षेत्र में ओला वृष्टि से करीब 48 ग्राम प्रभावित हुए हैं। फसलों में ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेने राजस्व विभाग की सर्वे टीमें क्षेत्र में पहुंचना शुरू हो गई हैं। जो किसानों के खेतों पर जाकर नुकसान का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।

सर्वे दल किसान के कितने रकबे में मसूर, चना और गेहूं बोया गया है उसकी जानकारी के हिसाब से नुकसान दर्ज कर रही हैं। जमुनिया गोडा खो, महुआखेड़ा कला, रहमा के किसानों ने बताया कि चना मसूर के साथ गेहूं की फसल भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। सर्वे दल किसानों के सामने ही रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। गेहूं फसल के सर्वे में दिक्कत आ रही है। आड़ी हुई गेहूं की फसल धीरे धीरे खड़ी हो गई है, लेकिन बालियां टूटने और ओलों की मार झेल चुकी बालियों के दाने का आंकलन नहीं हो पा रहा है कि उपज की क्या स्थिति रहेगी। सागोनी के किसान बालगिरी गोस्वामी, ककरूआ के किसान इस्माइल खान,जमुनिया के किसान धनसिंह, महुआखेड़ा के किसान सौरभ शर्मा का कहना है कि गेहूं की फसल का भी पूरा नुकसान लिखा जाना चाहिए।

दल से पहले पटवारियों ने जो सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की थी उसके मुताबिक सर्वाधिक प्रभावित रहमा गांव में 80 प्रतिशत फसलें बर्बाद हुई हैं, तो 6 मकानों को क्षति पहुंची है। वहीं महुआखेड़ा कला एवं जमुनिया ता.महुआखेड़ा कला, महगवां टप्पा,जरूआ, तिन्सुआ,चांदोड़ा, टेकपार मुंजप्ता में 70 से 80 प्रतिशत फसलें प्रभावित होना बताया गया है। इसके अलावा मंहगवा चंद्रपुरा 50 से 60, ढोबी 40 से 50 प्रतिशत नुकसान बताया गया है।

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