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अस्पताल में मरीजों ने किया हंगामा, मासूम को एक घंटे बाद मिल सकी ऑक्सीजन

सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य शिविर के चलते सुबह 10 बजे से अस्पताल में पर्चे बनाना बंद कर दिए गए।...

Danik Bhaskar | Apr 10, 2018, 02:05 AM IST
सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य शिविर के चलते सुबह 10 बजे से अस्पताल में पर्चे बनाना बंद कर दिए गए। वहीं डॉक्टर्स ने मरीजों को भी नहीं देखा। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी बीच एक मासूम को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया जिसे नर्स पुष्पा शर्मा के प्रयास से एक घंटे बाद ऑक्सीजन लगाई जा सकी।

इसी दौरान अन्य मरीजों ने अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर नायब तहसीलदार थानसिंह लोधी अपनी टीम के साथ पहुंचे और मरीजों के उपचार की व्यवस्थाएं कराई गई। सुबह 10 बजे ग्राम कस्बा चौका से ममता शिल्पकार अपनी डेढ़ साल की बच्ची ललिता पुत्री प्राणसिंह शिल्पकार को गंभीर अवस्था में लेकर अस्पताल पहुंचीं। लेकिन पर्चे नहीं बनने और डाक्टर द्वारा बिना पर्चे के देखने से मना करने पर लोग भड़क गए और अस्पताल प्रबंधन को जमकर खरी खोटी सुनाई।

इस बीच मासूम ललिता की हालत बिगड़ गई। इसके करीब एक घंटे बाद नर्स पुष्पा शर्मा ने तत्काल डाक्टर को बुलवाकर बच्ची का उपचार शुरू करवाया और उसे ऑक्सीजन लगवाई। प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया।

उपस्थित डॉक्टर्स ने मरीजों को भी नहीं देखा, इससे मरीज इलाज के लिए परेशान होते रहे

अस्पताल के बाहर 108 एंबुलेंस खड़ी होने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

बाहर खड़ी रही 108 एंबुलेंस, कॉल सेंटर से कहा गया दो घंटे बाद आएगी

ललिता को रेफर करने के लिए जब 108 पर कॉल करके एंबुलेंस की मांग की गई तो कॉल सेंटर से जवाब मिला की एंबुलेंस 2 घंटे बाद मिलेगी। जबकि उस समय108 एंबुलेंस अस्पताल के गेट के बाहर खड़ी हुई थी। जबकि कॉल सेंटर पर ऑपरेटर को जानकारी दी गई की एंबुलेंस बाहर है और आने में 2 घंटे का समय लगेगा। उक्त बात लोगों ने नायब तहसीलदार थानसिंह को बताई जब तक वे बाहर आकर 108 को देखते वह कहीं ओर चली गई। नायब तहसीलदार ने बच्ची की नाजुक हालत देखकर रोगी कल्याण समिति की एंबुलेंस से उसे जिला चिकित्सालय भिजवाया।

मीडिया के पहुंचते ही पर्चे बनना शुरू

मीडिया के पहुंचने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए गंभीर मरीजों के पर्चे बनाना शुरू करवा दिया। तभी नायब तहसीलदार थानसिंह लोधी, पटवारी प्रदीप शर्मा व अन्य पहुंचे और परेशान मरीजों की व्यथा सुनकर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अवगत कराया। तथा व्यवस्थाओं को दुरूस्त कराया।

एक घंटे तक भटकने के बाद बच्ची को लगाई गई ऑक्सीजन।

नहीं पहुंचे बीएमओ, बनाया पंचनामा

नायब तहसीलदार व उनकी टीम पूरे अस्पताल में घूमकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए बताया कि अस्पताल में वाकई मरीज परेशान हैं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी और बीएमओ एसबी कुलकर्णी को फोन किया, लेकिन वे कहीं ओर होने के कारण अस्पताल नहीं पहुंचे। नायब तहसीलदार ने पंचनामा बनाकर कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है।

नायब तहसीलदार ने डॉक्टर बलैया से कराया उपचार

दो बच्चों सहित कुत्ते के काटने से घायल हुए मरीज भी 2 घंटे तक परेशान होते रहे,बच्चों का पिता लखन उन्हें लेकर प्राइवेट डॉक्टर के पास चला गया और तुलसीपार निवासी रतनलाल पुत्र बारेलाल 28 वर्ष अस्पताल में मौजूद रहा। जिसे नायब तहसीलदार ने डा.आरके बलैया से उपचार कराया। वहीं चंद्रेश अहिरवार टेकापर निवासी अपने ढाई साल के बच्चे को आखों में पीड़ा होने से भी परेशान हुआ तथा एक महिला रेशमा नरवरिया निवासी श्याम नगर ने 5 तारीख का पर्चा दिखाते हुए नायब तहसीलदार को बताया कि पांच दिन से महिला डाक्टर नहीं मिल रही हैं जो मिलती हैं वे दूसरी महिला डाक्टर को दिखाने का बोलती हैं। पांच दिन से वह अपना उपचार नहीं करा पा रही है। इस तरह अन्य मरीजों ने भी डॉक्टर के दुर्व्यवहार की शिकायत की।

किए हैं लोगों के बयान दर्ज