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60 हजार की आबादी वाले नगर की सुरक्षा के लिए 50 से भी कम जवान

जिस तेजी से नगर की आबादी बड़ी है उस हिसाब से थाने का पुलिस बल कम है। बल की कमी के कारण घटित अपराधों पर अंकुश लगाने के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:05 AM IST

60 हजार की आबादी वाले नगर की सुरक्षा के लिए 50 से भी कम जवान
जिस तेजी से नगर की आबादी बड़ी है उस हिसाब से थाने का पुलिस बल कम है। बल की कमी के कारण घटित अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है। करीब 60 हजार की आबादी वाले नगर में पुलिस बल की संख्या पचास को भी नहीं छू पाई।

शहर के 18 वार्डों के अतिरिक्त थाने पर करीब 131 गांवों का भार भी है। जिसकी जनसंख्या करीब सवा लाख से भी अधिक है। आज की परिस्थिति के हिसाब से काम ज्यादा है, लेकिन जवानों की संख्या कम है। नगर व आसपास के क्षेत्रों में होने वाले विभिन्न आयोजनों में या वीआईपी ड्यूटी में भी जवानों को लगाया जाता है। कुछ पुलिस जवान दिन रात लिखा पढ़ी में लगे रहते हैं तो दो जवानों को न्यायालयीन कार्य में लगना पड़ता है। तो करीब तीन जवान उप जेल से मुल्जिमों को पेशी पर लाने ले जाने के लिए ड्यूटी देते हैं। तहसील से बाहर मुल्जिमों को पेशी पर ले जाने के लिए भी करीब दो जवान लगाए जाते हैं।न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी करीब 4 जवान ड्यूटी देते हैं।

मुख्य सागर भोपाल मार्ग होने के कारण प्रतिदिन औसतन दो वीआईपी का गुजर सागर से भोपाल या भोपाल से सागर की ओर होता है। जिसमें भी पुलिस वेन मय जवानों के वीआईपी को नगर की सीमा से लाने ले जाने का कार्य करती है। जब कोई धार्मिक आयोजन होता है तो बाहर के थानों से पुलिस बल बुलाकर व्यवस्थाएं करवाना पड़ती है। यदि ऐसे में कोई अप्रिय घटना घटित हो जाए तो उसका ठीकरा भी पुलिस के सिर पर फूटता है।

बल की कमी से अपराधों पर नहीं लग पा रहा अंकुश, शहर के 18 वार्डों के अतिरिक्त थाने पर करीब 131 गांवों का भार

सांप्रदायिकता के मामले में अति संवेदनशील है नगरीय क्षेत्र

नगर सहित क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए बल की कमी से जूझ रही पुलिस को गश्त करने के लिए अधिकारियों को स्वयं रात रातभर घूमकर गश्त करनी पड़ती है। बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर में वाहनों की तादाद भी काफी हद तक बढ़ गई है। इसलिए यातायात नियंत्रण के लिए यहां ट्रैफिक पुलिस की भी कमी है कई बार वाहन दुर्घटनाओं के कारण अप्रिय स्थिति निर्मित हुई। मप्र के रिकार्ड में बेगमगंज वैसे भी सांप्रदायिकता के मामले में अति संवेदनशील माना जाता है।

बल की कमी से जुझ रहा है थाना।

नगर रक्षा समिति सदस्यों को जिम्मेदारी देकर बनानी पड़ रही व्यवस्था

वर्तमान में एक थाना प्रभारी के अलावा तीन सहायक उप निरीक्षक, एक महिला अधिकारी व एक महिला आरक्षक सहित करीब तीन दर्जन अन्य पुलिस कर्मी हैं और थाने में मात्र एक वाहन है और डायल 100 है। यदि कोई इमरजेंसी हो तो वाहनों की कमी के कारण परेशानी होती है। पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था एवं रात्रि गश्त के लिए नगर रक्षा समिति सदस्यों को भी जिम्मेदारी दे कर व्यवस्था जुटाना पड़ती है।

आबादी बढ़ी पुलिस घटी : बढ़ती आबादी के अनुरूप अपराध नियंत्रण के लिए बेगमगंज थाने मं पुलिस बल बढ़ाना आवश्यक है। पुलिस कर्मियों की संख्या कम है और काम ज्यादा इसका असर पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। बेतहाशा बढ़ती आबादी के अनुसार ही पुलिस बल की संख्या बढ़ाई जाए तथा खाली पड़े पदों की पूर्ति भी आवश्यक है वर्तमान जो पुलिस बल है औसतन उतना पुलिस बल तो एक वार्ड के लिए ही पर्याप्त होता है।

आईजी की अनुशंसा के बाद भी नहीं बढ़ा बल

तत्कालीन आई जी स्वर्ण सिंह के नगर आगमन पर पत्रकारों एवं गणमान्य लोगों ने पुलिस बल बढ़ाने की मांग की थी। इस पर श्री सिंह ने शीघ्र बल बढ़ाने के लिए शासन को लिखा भी था लेकिन बल में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

फिर मिला आश्वासन

गत दिनों डीआईजी डीआईजी रामाश्रय चौबे सब डिवीजन की बैठक लेने आए तो पत्रकारों ने उनसे बल की कमी दूर करने और पुलिस सहायता केंद्र शुरू कराने की बात कही। इस पर उन्होंने भी बल बढ़ाने के लिए सिर्फ आश्वासन ही दिया।

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