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दिखा चांद, रहमतों, बरकतों, नेकियों और नेमतों का महीना रमजान आज से

रमजान माह को महीनों का सरदार कहा जाता है। यह महीना रहमतों, बरकतों, नेकियों और नेमतों का महीना है। पूरे माह मुस्लिम...

Danik Bhaskar | May 17, 2018, 02:05 AM IST
रमजान माह को महीनों का सरदार कहा जाता है। यह महीना रहमतों, बरकतों, नेकियों और नेमतों का महीना है। पूरे माह मुस्लिम धर्मावलंबी खुदा के आदेश का पालन करने के लिए रोजा रखते हैं।

आसमान पर चांद नजर आते ही रमजान माह शुरू हो जाता है जिसमें विशेष नमाज तरावीह में 20 रकात नमाज इशां की नमाज के साथ शुरू हो गई है। मुसलमानों को पूरे साल रमजान माह के आने का बेसब्री से इंतेेजार रहता है। माह रमजान को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। मस्जिदों की साफ-सफाई के साथ प्रतिदिन रोजा खोलने के लिए अफतारी की व्यवस्थाएं पहले से ही की जाती हैं। जिला मुख्यालय रायसेन में रोजा रखने के लिए किले से नगाड़े बजाकर समय की जानकारी दी जाती है तथा रोजा खोलने के लिए तोप का गोला दाग कर सूचना दी जाती है, वहीं बेगमगंज शहर में लाउडस्पीकर से कव्वालियां आदि बजाकर उसके जरिए शहरई के समय की सूचना दी जाती है तथा रोजा खोलने के लिए सिप्पा आवाज वाला गोला चला कर दी जाती है। अलग-अलग स्थानों पर इसके तरीके विभिन्न हैं।

रमजान का महीनाः अरबी जुबान में गर्मी की शिद्दत को रम्ज और धूप से तपती हुई जमीन को रम्जा कहा जाता है। प्रारम्भ में रमजान का माह तेज गर्मियों में आता था, इसलिए इसे रमजान कहा जाने लगा। एक कहावत के अनुसार रमजान खुदा के नाम में से एक है, इसलिए इसे शहरे रमजान या माहे रमजान भी कहते हैं। पवित्र कुरआन में भी इसी प्रकार लिखा है। पैगम्बरे इस्लाम ने बताया कि आखरी आसमानी सहीफा कुरआन इसी महीने में लौहे महफूज आसमान से दुनिया पर भेजा गया। इसी माह में शबे क्रद भी है जिसमें इबादत (पूजा),करने का सवाब हजार माह के बराबर मिलता है।

रोजा रखने का तरीका : रोजा सभी धर्मों में किसी न किसी तरह रखा जाता है। इस्लाम धर्म में रोजा रखने का तरीका है, वह रात के आखिरी पहर सुबह होने से पहले कुछ खाना जिसे शहरई कहते हैु, इसके बाद पूरे दिन खाना पीना बंद रखकर शाम को सूरज डूबते ही रोजा खोलना, रोजे की हालत में खुदा की इबादत करना, पांचों वक्त की नमाज व बीस रकात तरावीह पढ़ना, कुरआन का पाठ करना आदि।

तरावीह क्या है

सभी मस्जिदों में हाफिजे कुरआन जिसे कंठस्थ पुरा कुरआन पाक याद होता है, वह तरावीह में कुरआन सुनाता है हाफिज के पीछे लोग नमाज की हालत में सुनते हैं। पूरा कुरआन पाक तरावीह में सुनना सुन्नत है तथा पूरे माह कुरआन को तरावीह में सुनना एक अलग सुन्नत है। तरावही को दो दो रकात के साथ बीस रकात में पढ़ा जाता है। हर चार रकात के बाद थोड़ी देर बैठा जाता है, उस दौरान एक दुआ पढ़ी जाती है। तरावीह के दौर तीन दिन, 7 दिन, 10 दिन, 21 -25- 27 दिन के होते हैं एवं इसी में एक रात का शबीना होता जिसमें पूरी रात में कुरआन का पाठ हाफिज के जरिए किया जाता है। तरावीह पढ़ने का बहुत अधिक पुण्य मिलता है।

माह रमजान के तीन हिस्से दस-दस दिन के हैं

रमजान का पहले दस दिन का हिस्सा रहमत है, दूसरा मग्फिरत और तीसरा जहन्नम (नर्क) की आग से बचने का है। जो व्यक्ति इस माह में अपने नौकर से कम काम लेता है, खुदा उसे नर्क की आग से आजाद कर देगा । रमजान माह में रोजा अफतार पार्टिया भी आयोजित की जाती हैं।