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गिर रहा भूजल स्तर, सरकारी कार्यालयों में भी नहीं लगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

भास्कर संवाददाता|बेगमगंज तहसील में गिरते भू-जल स्तर ने चिंता बढ़ा दी है। इस बार अप्रैल में ही करीब 4 फीट पानी नीचे...

Dainik Bhaskar

Apr 11, 2018, 02:05 AM IST
गिर रहा भूजल स्तर, सरकारी कार्यालयों में भी नहीं लगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
भास्कर संवाददाता|बेगमगंज

तहसील में गिरते भू-जल स्तर ने चिंता बढ़ा दी है। इस बार अप्रैल में ही करीब 4 फीट पानी नीचे उतर चुका है। मई तक और भी बढ़ने की संभावना है। जलस्तर को बनाए रखने हर साल निर्देश आते हैं, लेकिन उनका पालन नहीं होता। मौजूदा हाल में ग्राउंड वाटर लेवल को बढ़ाने के लिए सरकारी महकमा, जो भी कर रहा है वह कागजी कार्रवाई के सिवाए कुछ नहीं है। प्रशासन की अनदेखी के कारण आम लोग भी नियम-निर्देशों का पालन करने की जरूरत नहीं समझते हैं। इस कारण गैर सरकारी भवनों में भी रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नदारद हैं।

शहर में लगभग 36 से ज्यादा शासकीय भवन हैं। इनमें सरकारी कार्यालय, स्कूल, बैंक, छात्रावास आदि शामिल हैं। नवीन तहसील भवन को छोड़कर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कहीं नहीं बना। जबकि 2012 में तैयार शासन की गाइडलाइन के मुताबिक हर भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य है। बेगमगंज में ही सरकारी दफ्तरों में ग्राउंड वाटर री-चार्जिंग के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट 3 प्रतिशत हैं। इस संबंध में प्रशासन की ओर से भी सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

गैर सरकारी भवनों में भी रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है

36 से ज्यादा शहर में शासकीय भवन हैं, लेकिन एक ही भवन में लगा है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

शासकीय भवनों में नहीं लगाया जा रहा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।

1000 फीट की छत तो 80 हजार लीटर पानी उतार सकते है जमीन में

एक हजार फीट की छत से एक साल में 80 हजार लीटर पानी जमीन में उतारा जा सकता है। छत के आउटलेट को पीवीसी पाइप के जरिए जोड़ा जाता है। पाइप को फिल्टर के साथ कनेक्ट किया जाता है, तो पानी को साफ करता है। शुरुआती पानी को बहाने के लिए वाल्व भी बनाया जाता है। फिल्टर से साफ पानी को बोरिंग, हैंडपंप या कुएं में उतारा जा सकता है। इसके अलावा गड्ढा बनाकर भी पानी को सीधे जमीन में उतारा जा सकता है।

रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं

शहर में बने सभी शासकीय कार्यालयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। इसके अलावा शहर में करोड़ रुपए की लागत से बनी नई बिल्डिंगों में भी इस हार्वेस्टिंग के लिए राशि जरूर जमा कराई जाती है, लेकिन इसको बनाने वाले की संख्या काफी कम हैं। एसबीआई काॅलोनी, टीचर कालोनी, डीडी कॉलोनी, डिपो काॅलोनी सहित नगरीय क्षेत्र में में बनाई गई इमारतों में भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया है।

2012 में तैयार शासन की गाइडलाइन के मुताबिक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है अिनवार्य

यहां किए गए थे प्रयास

सिस्टम को लगाने के लिए प्रयास किए गए थे। लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। तहसीली यह बिल्डिंग पीडब्ल्यूडी ने बनाई थी। वर्षों पुरानी इस बिल्डिंग में भी अभी तक रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाया गया है। तहसीली के दोनों भवनों पर वॉटर हार्वेस्टिंग को आसानी से लगाया जा सकता है। यहां पर्याप्त स्थान है। थाने के दोनों भवनों, पीएचई भवन,बस स्टैंड की मार्केट, सोसायटी मार्केट, गर्ल्स स्कूल के नए भवन, छात्रावास के तीनों भवन ,जनपद के दोनों भवन, कृषि विभाग कार्यालय, उपजेल, वेयर हाउसों की भवनों पर भी वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बनाया जाना चाहिए।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्देश


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