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बाहर से आने वाले मानसिक विक्षिप्त पुरुष महिलाओं की तादाद बढ़ी

नगरीय क्षेत्र में दिनों दिन बाहर से आने वाले मानसिक रूप से विक्षिप्त पुरुष व महिलाओं की तादाद बढ़ती जा रही है। कई ने...

Danik Bhaskar | May 27, 2018, 02:10 AM IST
नगरीय क्षेत्र में दिनों दिन बाहर से आने वाले मानसिक रूप से विक्षिप्त पुरुष व महिलाओं की तादाद बढ़ती जा रही है। कई ने लंबे समय से यहां पर अपना डेरा जमा रखा है। हालांकि उनमें से कई चुपचाप अपने ठिए पर बैठे रहते है। तो कुछ यहां वहां घूमते है और उनके साथ छेड़खानी कर परेशान करते है और वे लोगो पत्थर आदि उठाकर मारते है जिससे कई लोग घायल हो चुके है। तो दिनभर इधर उधर भटकने या श्मशान भूमि अथवा सागर रोड पर डेरा जमाने वाले ऐसे दो लोग पूर्व में अकाल मौत की आगोश में जा चुके है। ऐसे लोगो की जानकारी नहीं मिलने के कारण पुलिस मर्ग कायम कर पीएम उपरांत उन्हें दफनवा देती है।

कुछ मानसिक विक्षिप्त तो नगरीय क्षेत्र के निवासी है जिन्हें बांधकर रखना या सुरक्षित रखना परिजनों के बस की नहीं है यदि थोड़ा सा प्रयास किया जाए तो वे उपचार से सही हो सकते है। लेकिन कोई भी सामाजिक संस्था इसमें प्रयास नहीं कर रही है। एक पागल ने तो पूरी सर्दियों से लेकर अभी तक भोपाल रोड स्नेह भवन छात्रावास के पास अपना डेरा जमा रखा है तो दो पागल होटलों के आसपास घूमते नजर आते है। वहीं एक महिला पागल भी यहां वहां घूमकर अपनी जिन्दगी गुजार रही है। इससे पहले पूर्व में दो महिला पागलों के साथ कुछ असामाजिक तत्व गलत हरकत भी कर चुके है। तब तत्कालीन पुलिस अधिकारी के सामने शांति समिति में बात आने पर उन्हें उपचार के लिए ग्वालियर भिजवाया गया था। एक पागल जो कहीं बाहर से आया है उसको सभी सद्दाम के नाम से पुकारते है और वह कई लोगो के साथ मारपीट भी कर चुका है। थोड़े से इलाज से सही हो सकता है। कई बार बच्चे उसकी हरकतों से डरकर भाग जाते है। जबकि शासन ने नियम बनाया है कि इस तरह के मानसिक विक्षिप्तों की विधिवत कार्रवाई उपरांत उपचार के लिए भिजवाया जाए लेकिन कोई अधिकारी आगे नहीं आना चाहता क्योंकि कोई सामाजिक संस्था इसको ले जाने की जवाबदारी भी नहीं उठा रही है। इसलिए ऐसे मानसिक विक्षिप्त उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे है। नगर के बुद्धिजीवियों ने कले कटर भावना वालिंबे से ऐसे मानसिक विक्षिप्तों को उपचार हेतु ग्वालियर या सेवा आश्रम उज्जैन भिजवाया जाए।