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42 साल के इंतजार के बाद बीना सिंचाई परियोजना पर अमल

42 साल के लंबे इंतजार के बाद बीना सिंचाई परियोजना पर अब जाकर काम शुरू होने जा रहा है। इसकी दो बड़ी खासियत है। पहली यह...

Dainik Bhaskar

Jul 01, 2018, 02:10 AM IST
42 साल के इंतजार के बाद बीना सिंचाई परियोजना पर अमल
42 साल के लंबे इंतजार के बाद बीना सिंचाई परियोजना पर अब जाकर काम शुरू होने जा रहा है। इसकी दो बड़ी खासियत है। पहली यह कि बीना नदी पर बनने वाले दो बांधों में से मढ़िया बांध पर बिजली बनेगी। जिससे दूसरे बांध चकरपुर से खुरई, बीना व सुरखी इन तीन विधानसभाओं के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बिजली का पूरा खर्च बचेगा। दूसरी खास बात यह है कि सीधा खेतों में लगे स्प्रिंकलर तक पानी पहुंचाने वाली सागर जिले की यह पहली परियोजना है। एक बांध पर काम करने के लिए एजेंसी भी तय हो चुकी है। 2 जुलाई को खुरई में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार इस परियोजना की शुरुआत करने जा रहे हैं। जिससे सागर जिले के किसानों में खुशी है तो रायसेन जिले के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं वे गमगीन होकर अपने पुरखों की जमीन को अधिग्रहित होते देख रहे हैं।

10 किमी की दूरी पर दो बांध, सिंचाई के साथ पीने का पानी भी : बीना नदी पर पहला बांध मढ़िया गांव के पास बनेगा। यहां से करीब 10 किमी दूरी पर दूसरा बांध चकरपुर के पास प्रस्तावित है। मढ़िया बांध पर 21 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए संयंत्र लगेगा। चकरपुर बांध से खुरई के 142, मालथौन के 111, बीना के 65, राहतगढ़ के 45 गांवों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग इतनी ही बिजली खर्च होगी। चकरपुर बांध का काम राजस्थान की एजेंसी को मिला है। मढ़िया बांध की एजेंसी अभी तय होना है।

फॉरेस्ट को जमीन के बदले जमीन और 170 करोड़ दिए : बीना सिंचाई परियोजना पर 42 साल पहले सर्वे शुरू हुआ था। पिछली सरकारों और यहां के जनप्रतनिधियों ने रुचि नहीं ली। वहीं फॉरेस्ट की महज 1025 हैक्टेयर जमीन डूब में आने के कारण और इन्वायरमेंटल क्लीयरेंस का मामला सालों तक अटका रहा। फॉरेस्ट को डूब में आ रही जमीन के बदले जमीन और डूबने वाले पेड़ों को फिर से दूसरी जगह आबाद करने के लिए 170 करोड़ रुपए की राशि दी। परियोजना में पहले चार बांध प्रस्तावित थे, लेकिन डूब क्षेत्र को कम करने के लिए बांधों की संख्या आधी रह गई।

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