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सिंचित जमीन को बता रहे असिंचित, भूमि अधिग्रहण के लिए नहीं ली जा रही सहमति

तहसील के सागर सीमा में प्रस्तावित बीना बांध परियोजना के निर्माण के विरोध में किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम का...

Danik Bhaskar

Apr 18, 2018, 02:10 AM IST
तहसील के सागर सीमा में प्रस्तावित बीना बांध परियोजना के निर्माण के विरोध में किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन बेगमगंज एसडीएम को सौंपा है। किसानों की मांग है कि मडिया डेम परियोजना में किसानों की जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। लेकिन किसानों को किसी तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही और न ही पंचायत स्तर पर परियोजना से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है।

किसानों का कहना है कि सिंचित जमीनें होने बावजूद भी असिंचित बताया जा रहा है। जबकि जमीनें अधिग्रहण कानून के तहत जमीन अधिग्रहण करने से पहले किसानों की सहमति ली जाती है। बीना बांध परियोजना निर्माण से बेगमगंज तहसील के किसानों की जमीनें डूब रही है, जबकि इसका लाभ सागर जिले के किसानों को रहा है। जबकि जिन किसानों की जमीनें डूब रही है। उन किसानों का जीविकोपार्जन खेती के अलावा अन्य कोई साधन नहीं है। किसानों का जीवन का आधार केवल खेती है, जो परियोजना निर्माण कर किसानों से छीना जा रहा है। इसके साथ ही किसानों ने पांच सूत्रीय ज्ञापन में मांग की है कि परियोजना निर्माण से कैचमेंट एरिया से सेमरी जलाशय की कमांड एरिया डूब रहा है। नेशनल हाईवे प्रभावित हो रहा है।

इस क्षेत्र के किसानों की जमीनें पूर्ण सिंचित एवं बहू फसलीय है। जिन्हें सर्वे में असिंचित दिखलाया जा रहा है, हजारों हेक्टेयर रिजर्व फारेस्ट प्रभावित हो रहा है।

किसानों ने उठाई मांग

किसानों ने मांग की है कि बीना परियोजना निरस्त की जाए। क्योंकि परियोजना से लगभग चालीस गांव प्रभावित हो रहे है,जिनकी आबादी तीस हजार से अधिक है। अगर बीना परियोजना का निर्माण करते हैं तो इतनी बड़ी आबादी के किसान बेरोजगार हो जाएंगे। इन किसानों के लिए क्या रोजगार के अवसर उपलब्ध हो पाएंगे। वहीं डाक्टर सुनीलम ने कहा कि बेगमगंज के किसानों सही जानकारी दी जा रही है। जबकि सागर जिले के राहतगढ़ तहसील के तीन गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहण संबंधी अखबारों में प्रकाशन भी हो चुका है। वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के विधायक मंत्री किसानों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि परियोजना का निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। एक तरफ अंदर ही अंदर विभाग अपना काम कर रहा है वहीं किसानों से जानकारी छिपाई जा रही है।

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