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ओपीडी में दोगुनी हुई मरीजों की संख्या आठ दिन में 1600 मरीज पहुंचे अस्पताल

भीषण गर्मी ने अब लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले 8 दिनों में अस्पताल में 1600 से ज्यादा मरीज उपचार के...

Dainik Bhaskar

Apr 13, 2018, 02:15 AM IST
ओपीडी में दोगुनी हुई मरीजों की संख्या आठ दिन में 1600 मरीज पहुंचे अस्पताल
भीषण गर्मी ने अब लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले 8 दिनों में अस्पताल में 1600 से ज्यादा मरीज उपचार के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें वायरल फीवर से पीड़ितों की संख्या सबसे ज्यादा है। खान-पान में ध्यान नहीं रखने से उल्टी-दस्त के मरीज भी आ रहे हैं। इसके अलावा टाइफाइड व पीलिया रोगियों की संख्या अलग है। अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री चल रहा है। रात का तापमान भी बढ़कर 22 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है। गर्मी जैसे-जैसे अपने तेवर दिखा रही है वैसे-वैसे लोगों में बुखार और डायरिया की शिकायतें बढ़ने लगी है। अस्पताल में रोजाना औसतन 200 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। आम दिनों में यह आंकड़ा 50 से 100 तक रहता है। अधिकांश लोग उल्टी-दस्त, तेज बुखार, पीलिया, टाइफाइड, खांसी से पीड़ित हैं। इपिस टेक्सिस (नाक से खून बहना) के भी कुछ मामले आए हैं। प्रभावितों में बच्चे व बड़े शामिल हैं। आंखों में जलन, चुभन, लालपन, सूखापन व सिरदर्द की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में पदस्थ डॉ. एसबी कुलकर्णी बीएमओ, डाॅ. आरके बलैया, डाॅ. लक्ष्मीकांत गुर्जर, डाॅ. विजय लक्ष्मी नागवंशी का कहना है कि यदि आप गर्मी के दिनों में भी खानपान पर ध्यान नहीं दे रहे हैं तो सावधान हो जाइए, खाने-पीने में बरती गई जरा सी लापरवाही आपको बीमार कर सकती है।

अस्पताल से सभी वार्ड मरीजों से भरे: सिविल अस्पताल के सभी वार्ड मरीजों से भरे हैं। यहां भर्ती मरीज बुखार के साथ उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। पीड़ितों में ग्रामीणों की संख्या ज्यादा है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के मौसम में तेज धूप और धूल भरी हवा से बचें। क्योंकि गर्मी में उड़ने वाली धूल का ज्यादा असर एलर्जी व अस्थमा रोगियों पर होता है। इससे रोगियों की सांस की नली व फेफड़ों पर असर होता है। नली सिकुड़ने लगती है। खांसी, बेचैनी, एलर्जी, राइनाइटिस, खुजली की परेशानी होती है। सांस लेने में तकलीफ भी होती है। तापमान बढ़ने के साथ आंख में एलर्जी व पानी की कमी हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों से सबसे अधिक आ रहे मरीज, डॉक्टर दे रहे सतर्कता बरतने की सलाह

अिधकतम तापमान 400 डिग्री से ऊपर, गर्मी से खराब हो रही लोगों की सेहत

अस्पताल में दोगुनी हुई मरीजों की संख्या।

इन बातों का रखें ध्यान

धूप से आने के बाद कुछ देर रुककर पानी पीएं, यदि आप एसी कार या कमरे से बाहर निकल रहे हैं तो सीधे धूप में न जाए कुछ देर रुककर जाएं। ताकि शरीर का तापमान बना रहे। तली-गली चीजों से परहेज करें। धूप में चेहरे पर कपड़ा बांधकर निकले। ताजा बने भोजन का ही सेवन करें। खाद्य पदार्थों को ढंककर रखें। खाना खाने, परोसने व बनाने से पूर्व और शौच के पश्चात हाथ साबुन से अच्छी तरह से धोएं। मटके से पानी निकालने के लिए हत्थे वाले लोटे का प्रयोग करें। जहां तक संभव हो पानी उबालकर पीएं। बासी भोजन न करें। कोई भी खाद्य सामग्री गंदे हाथों से न खाएं। धूल, मक्खियों से दूषित सड़े-गले फल व खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। आइस्क्रीम, कुल्फी, व दूध से निर्मित पेय पदार्थों अनजान स्थान से न खरीदें।

आने वाली परेशानियां और उनसे बचने के उपाय

परेशानी: जलन, चुभन, लालपन व सिर में दर्द होता है। सीधे सूर्य के प्रकाश के में ज्यादा समय रहने से होता है।

बचाव: ठंडे पानी से आंखों को धोएं। धूप में अच्छी क्वालिटी का चश्मा लगाकर निकलें।

परेशानी: गर्मी से शरीर में शिथिलता आ जाती है। मांसपेशियों में ऐंठन, सिर व गर्दन में दर्द आम बात है। दूषित पानी से होने वाले रोग (उल्टी-दस्त, टाइफाइड, पीलिया आदि) भी हो सकते हैं।

बचाव: तेज धूप में निकलने से बचें। साफ पानी पीएं। खुले में रखे पदार्थ नहीं खाएं। जितना हो बाजार का कोई भी नाश्ता या खाना खाने से बचें।

परेशानी: धूप व गर्म हवा ने इंफेक्शन की दिक्कतें हो जाती है। बच्चों नाक से खून आने लगता है।

बचाव: पसीने में ठंडे पानी का सेवन न करें। आइसक्रीम व अन्य पेय के उपयोग से भी बचें। पीना ही है तो नींबू-पानी का सेवन करें।

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