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खुशनसीब हंै वो मां बाप जिनका बेटा हाफिजे कुरआन हो गया

मदरसा मदीनतुंल उलूम पठान वाली मस्जिद में एक साथ चार हाफिज होना इस बात की तस्तदीक है कि मदरसे के उस्ताद मेहनत कर रहे...

Danik Bhaskar | May 08, 2018, 02:20 AM IST
मदरसा मदीनतुंल उलूम पठान वाली मस्जिद में एक साथ चार हाफिज होना इस बात की तस्तदीक है कि मदरसे के उस्ताद मेहनत कर रहे है। जिनमें से एक बच्चे ने एक बैठक में पूरा कुरआन सुनाने की सआदत हासिल की है। यह बढ़ी बात है। वो मां बाप भी खुशनसीब है जिनके बेटे हाफिजे कुरआन हो गए हैं। ये मदरसे आप सब के ताअव्वुन से चल रहे है। आरिफबिल्लाह सिद्दीकीया का फैज है ये मदारिस, हमें इनकी कद्रदानी करना चाहिए।

मदरसा मदीनतुल उलूम पठान वाली मस्जिद के सालाना जलसे में मेहमाने खुसूसी के तौर पर हथौरा बांदा उत्तर प्रदेश से तशरीफ लाए मौलाना हबीब अहमद बांदवी ने उक्त बात जलसे में कहीं। उन्होंने कहा कि मदरसे अस्हाफे सुफ्फा का सिलसिला है इसमें पढ़ने वाले बच्चे पैगम्बरे इस्लाम के मेहमान होते हैं। हमें इनका पूरा पूरा ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने उस्तादों और कमेटी के ओहदेदारान को खबरदार किया कि जो मेहनत आप कर रहे हैं उसमें मैं नहीं आना चाहिए यदि मैं आया तो मामला गड़बड़ हो जाएगा। काम करने वालों की नीयत यह होना चाहिए कि जो कुछ हो रहा है और हुआ है वह सब खुदा तआला ने कराया है। यदि यह सोच रही तो फिर कामयाबी ही कामयाबी है। इस मौके पर मौलाना हबीब अहमद ने मदरसे से हाफिज होने वाले चारों बच्चों मो.आमिर, असद खां, जुनेद खां, अब्दुल समद सहित इनके उस्ताद हाफिज अशफाक खां को पगड़ी बांधकर दस्तारबंदी (हाफिज की सनद) कर उन्हें इनामात से नवाजा। जलसे की शुरूआत में मदारिस के तुलबा ने कुरआन पाक की तिलावत से जलसे का आगाम किया और नात शरीफ का नजराना पेश किया। भोपाल से तशरीफ लाए हाफिज रिजवान ने बेहतरीन अंदाज में नात शरीफ का नजराना पेश कर वाहवाही लूटी। तो निजामत के फराइज मुफ्ती मो. युसुफ ने बेहतरीन अंदाज में करते हुए लोगो को अपनी और खींचा। ईस्ट मुम्बई से तशरीफ लाए मौलाना मो. हारून खां कासमी बिलगिरामी हरदोई ने दस्तारबंदी व इस्लाहे मुआशरा पर रोशनी डालते हुए लोगो को बताया कि अलकुरआन के मायने है कि सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब, वहीं उन्होंने बताया कि पैगम्बरे इस्लाम ने बताया कि जिस इंसान में चार सिफत नफली रोजा रखना, बीमार की खबर लेना वह किसी भी मजहब का हो, जनाजे की नमाज व दफन में शामिल होना और भूखे को खाना खिलाना। जिसमें ये सिफत होगी वह जन्नत (स्वर्ग )में जाएगा। गढ़ी से तशरीफ लाए मौलाना इनामुर्रहमान ने भी शुरूती बयान फरमाया और ताअर्रूफी बयान राहतगढ़ से तशरीफ लाए मुफ्ती मुस्तुफा खां ने करते हुए मदरसे के बारे में जानकारी दी।