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धर्म... रमजान के पूरे रोजे रखने से ही रमजान का हक अदा होता है: आलिम सामिद खां

बेगमगंज| रमजान माह में तीसरे जुमे की नमाज अता करने बड़ी संख्या में मस्जिदों में समाज के लोग पहुंचे। जिससे मस्जिदों...

Danik Bhaskar

Jun 02, 2018, 03:10 AM IST
बेगमगंज| रमजान माह में तीसरे जुमे की नमाज अता करने बड़ी संख्या में मस्जिदों में समाज के लोग पहुंचे। जिससे मस्जिदों में जगह कम पड़ गई। मर्कज मस्जिद में आलिम सामिद खां नदवी ने बताया की इस्लाम की बुनियाद पांच चीजों पर है। दो चीजें मालदारों पर है बाकी शेष तीन चीजे ईमान नमाज रोजा सब पर फर्ज है। हमें रमजान के पूरे रोजे रखना चाहिए। तभी रमजान का हक अदा होगा यदि कोई जानबूझकर रमजान का एक रोजा छोड़ दो सारी उम्र रोजे रखे तो उसका हक अदा नहीं किया जा सकता। बीमारी आदि के कारण रोजा नहीं रख पाए तो दूसरे रोजेदारों का ख्याल रखें। मौलाना ने आगे कहा कि जिन पर जकात फर्ज है वे अपने माल की पूरी जकात निकालकर गरीब मिस्कीन को तलाश कर उसे जकात दें ।जकात साहेबे निसाब को ढाई प्रतिशत देना पड़ती है। जिस तरह नमाज के लिए हम मस्जिद जाते हैं उसी तरह जकात अदा करने के लिए सही व्यक्ति की तलाश कर उसे देना भी जरूरी है। उन्होंने सभी नमाजियों से रमजान के बाकी दिनों की कद्र करने की नसीहत दी। रमजान का तीसरा जुमा होने के कारण 6 मस्जिदों में अदा की जाने वाली जुमे की नमाज में काफी तादाद में नमाजी पहुंचे। जिससे सभी मस्जिदों में जगह की कमी देखी गई। जुमे की नमाज जामा मस्जिद, मंडी मस्जिद, मर्कज, मस्जिद बिलाल, पठान वाली मस्जिद, मस्जिद बालाई टेकरी पर अदा की गई। सभी मस्जिदों में उलेमा हजरात ने रमजान माह के संबंध में बयान किए और लोगों को खूब इबादत करने की नसीहतें की। वहीं रमजान माह में निकाले जाने वाले फितरे की रकम के बारे में बताया कि 30 रुपए प्रत्येक व्यक्ति की तरफ से निकालकर उन गरीबों को दे जो साहिबे निसाब नहीं है।

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