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बस संचालकों ने कहा-सरकार ने टैक्स बढ़ाया पर बसों का किराया नहीं, मंत्री को भेजा ज्ञापन

प्रदेश की परिवहन सेवा को सरकार बेहतर बनाने का भले ही दावा करती है, लेकिन हकीकत कुछ और है। टैक्स में वृद्धि हुई और...

Danik Bhaskar | Apr 14, 2018, 03:15 AM IST
प्रदेश की परिवहन सेवा को सरकार बेहतर बनाने का भले ही दावा करती है, लेकिन हकीकत कुछ और है। टैक्स में वृद्धि हुई और सरकार ने बसों का किराया 5 साल से नहीं बढ़ाया, जबकि 6 माह में डीजल के दाम 8 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए। इससे बस ऑपरेटरों के व्यवसाय पर संकट गहराने लगा है। बस संचालकों ने एक ज्ञापन परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह को भेजकर बसों का किराया बढ़ाए जाने की मांग की है।

मप्र सड़क परिवहन निगम बंद हुए 20 साल से अधिक समय हो गया, लेकिन मप्र सरकार स्वयं की ट्रांसपोर्ट कंपनी खड़ी नहीं कर पाई। निजी बस ऑपरेटरों को राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्यमार्ग के परमिट देकर उन्हें लंबी दूरी की परिवहन सेवा शुरू करने को प्रेरित किया था। शुरू में बस ऑपरेटरों ने फायदे के लिए रुचि दिखलाई, लेकिन धीरे धीरे मोटरयान कर में साल दर साल वृद्धि और केंद्र सरकार का डीजल और पेट्रोल के दामों से नियंत्रण समाप्त होने से डीजल के रेट लगातार बढ़ते गए। स्थिति यह है कि 6 माह में डीजल के रेट 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि होने का सीधा असर लंबी दूरी की बसों पर पड़ा है। ऑपरेटरों का कहना है कि बस चलाने में डीजल का खर्च नहीं निकल रहा है। टैक्स और डीजल के दामों में वृद्धि किए जाने का सबसे ज्यादा असर उन बस ऑपरेटरों पर हुआ है जिनके पास दो चार बसें हैं। ये एक दिन का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं।

बस ऑपरेटरों का कहना है कि सरकार ने समय समय पर टैक्स व डीजल के रेट तो बढ़ाए, लेकिन उस अनुपात में किराया नहीं बढ़ाया। मप्र में 5 सालों से बसों के किराए में वृद्धि नहीं की गई जबकि टैक्स और डीजल के रेट में 50 से 60 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई। सागर से भोपाल तक एक बस के आने जाने का खर्च दस हजार रुपए आता है। जबकि किराया 7 से 9 हजार रुपए मिलता है यदि चैकिंग में अधिक सवारी पाई जाती है तो जुर्माना अलग से वसूला जाता है।

डीजल के दाम बढ़ने के बाद भी 5 साल से नहीं बढ़ा किराया।

मंत्री ने दिया था आश्वासन

बस ऑपरेटरों का कहना है कि मार्च में प्रदेश के बस ऑपरेटर परिहवन मत्री भूपेंद्र सिंह से भोपाल में मिले थे। उन्हें टैक्स व डीजल के दामों में हुई वृद्धि से अवगत कराया था। मंत्री ने किराया बढ़ाने का आश्वासन दिया था। हम लोगों ने मंत्री के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित कर दी थी। एक माह हो गया लेकिन बसों का किराया नहीं बढ़ाया। बस मालिक चांद खान, मुन्ना खां, राजेश यादव आदि का कहना है कि डीजल पर वैट टैक्स देश में सबसे ज्यादा मप्र में लिया जा रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए डीजल पर वैट टैक्स कम किए जाने से कुछ राहत मिल सकती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।