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रैन बसेरा न हाेेने से दुकानों के शेड के नीचे बैठकर यात्रियों काे गुजारना पड़ती हे रात

जिले की सबसे बड़ी तहसील होने के बावजूद यहां रैन बसेरा के निर्माण नहीं होने से दूर दराज गांवों से आने वाले गरीबों को...

Dainik Bhaskar

May 28, 2018, 03:15 AM IST
रैन बसेरा न हाेेने से दुकानों के शेड के नीचे बैठकर यात्रियों काे गुजारना पड़ती हे रात
जिले की सबसे बड़ी तहसील होने के बावजूद यहां रैन बसेरा के निर्माण नहीं होने से दूर दराज गांवों से आने वाले गरीबों को रात फुटपाथ अथवा किसी दुकान के शेड के नीचे गुजारना मजबूरी बन गया है। साधन सम्पन्न या मध्यम वर्ग के लोग तो नगर की तीन लाजों में रुक कर रात गुजार लेते हैं,लेकिन गरीब लाज का खर्चा नहीं उठा पाता। यदि गरीब व्यक्ति के साथ महिलाएं या बच्चे हो तो उसकी परेशानी और अधिक बढ़ जाती है। दूर दराज के इलाकों से आने वाले गरीब तबके के लोगों को जब वापस जाने के लिए वाहन नहीं मिलता तो वे रैन बसेरा नहीं होने के कारण मुसाफिर खाने में ही रात गुजारते है, लेकिन वे वहां सुरक्षित नहीं रहते। यदि उनके साथ महिलाएं हो तो रात्रि के समय शराबी उन्हें परेशान करते हैं। जिस कारण वे अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हुए किसी सेठ की दालान अथवा किसी हवेली के चबूतरे पर रात गुजारने के लिए मजबूर होते हैं।

जबलपुर निवासी आकांक्षा,कविता एवं मनीष जबलपुर से भोपाल जाने के लिए निकले सागर से बस बदली जो बेगमगंज आकर फेल हो गई। जिस कारण उन्हें दूसरी बस के इंतजार में शाम हो गई लेकिन बस में जगह नहीं मिलने के कारण उन्होंने रात लाज में रुकने का मन बनाया, लेकिन नगर की दोनों लाज में कमरा नहीं मिलने से मजबूरी वश एक दुकान के बाहर बैठकर दूसरी बस का इंतजार करते देखे गए। जब उन्हें पता चला कि विदेश मंत्री सुषमा का क्षेत्र है तो उन्हें बड़ा अचरज हुआ कि इतने बड़े शहर में दो लाज के अलावा रैन बसेरा नहीं है जहां लोग रुक सकें। तहसील के आखरी छोर के ग्राम नारायणपुर से आए दशरथ सिंह का कहना है कि वे अदालत में पेशी पर चार लोग आए थे। पेशी के बाद अन्य कार्य के कारण आखरी बस छूट गई। जिससे उन्हें रात बीएस जैन की दहलान में गुजारना पड़ी, क्योंकि लाज में ठहरने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। यदि रैन बसेरा होता तो वे वहां ठहर जाते उनका कहना था कि नगर में रैन बसेरा होना चाहिए।

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