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हादसों के बाद भी ट्रालियाें में नहीं लगी रेडियम पट्‌टी

ट्रैक्टर्स की बढ़ती संख्या और ट्रालियों पर रेडियम पट्टी नहीं लगी होने से सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है। क्षेत्र...

Danik Bhaskar | Jun 01, 2018, 03:15 AM IST
ट्रैक्टर्स की बढ़ती संख्या और ट्रालियों पर रेडियम पट्टी नहीं लगी होने से सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है। क्षेत्र में तकरीबन डेढ़ हजार ट्रैक्टर-ट्रालियां हैं। जिनका सीधा संपर्क शहर से है। फसल से उपज लेने के बाद प्रतिदिन शहर की कृषि मंडी में आवक बढ़ने से शहर में डेढ़ दो सो ट्रालियां दौड़ती हैं। जब यह रुकती हैं तो इनकी पार्किंग सड़क किनारे ही कर दी जाती है।

शहर में चल रहे फोरलेन सड़क निर्माण के कारण और अधिक परेशानी आ रही है बार बार जाम से दो चार होना पड़ रहा है। वहीं इन ट्रालियों के पीछे व साइड से रेडियम पट्टी नहीं लगे होने के कारण रात में पता ही नहीं चलता कि कोई आगे कोई वाहन जा रहा है।

शहर में दौड़ती ट्रालियों में रेडियम का उपयोग नहीं होता है। जिससे पीछे आने वाले वाहन को ट्राली हेड लाइट की रोशनी में नजर नहीं आती है। इस ओर पुलिस प्रशासन का ध्यान नहीं है। चालानी कार्रवाई केवल बिना कागजात और दो पहिया वाहनों पर तीन सवारी बैठाने पर ही होती है। इन बिना रेडियम लगे सड़क पर खड़े होकर दुर्घटना को आमंत्रण दे रहीं ट्रालियों पर कार्रवाई न होने के कारण ट्राली चालकों के हौसले भी बुलंद हैं।

हुए गंभीर हादसे

गत वर्षों में गैरतपुर हादसे में 4 मरने के अलावा,सागर रोड पर रात में ट्राली से टकराकर ग्राम झिरिया के युवक की दर्दनाक मौत हो या फिर कोलूघाट पर रक्षाबंधन के दूसरे दिन अपनी ससुराल बेगमगंज आ रहे विदिशा निवासी की ट्राली से टकराकर मौत का मामला हो। अभी तक ट्राली से टकराने के कारण डेढ़ दर्जन अपनी जान गवां चुके हैं और कई अपने हाथ पैर तुड़वा कर विकलांगता का जीवन जीने को मजबूर हैं। वजह यह थी कि सड़क किनारे खड़ी ट्राली रात में नजर ही नहीं आई। ट्रालियों से हादसे बढ़ रहे हैं और प्रतिवर्ष इनकी संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।

अनदेखी

वाहनों मेंे रेडियम पट्‌टी नहीं लगी होने से रात के समय रहता है हादसे का अंदेशा

करते हैं कार्रवाई


ट्रालियों के पीछे नहीं लगी रेडियम पट्टियां।