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रमजान के दूसरे जुमे पर मस्जिदों में उमड़ी भीड़, हुईं मजहबी तकरीरें

पवित्र माह रमजान का दूसरे जुमे पर 6 मस्जिदों में जुमे की नमाज पढ़ने भारी संख्या में आए लोगों को भीषण गर्मी कुछ असर न...

Dainik Bhaskar

May 26, 2018, 03:15 AM IST
रमजान के दूसरे जुमे पर मस्जिदों में उमड़ी भीड़, हुईं मजहबी तकरीरें
पवित्र माह रमजान का दूसरे जुमे पर 6 मस्जिदों में जुमे की नमाज पढ़ने भारी संख्या में आए लोगों को भीषण गर्मी कुछ असर न डाल सकी। जामा मस्जिद,मर्कज,पठान वाली,बालाई टेकरी, बिलाल व मंडी मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की गई।

जुमे की नमाज से पहले उलमाएक्राम ने रमजान को लेकर प्रकाश डाला मर्कज मस्जिद के इमाम मौलाना शामिद नदवी ने बताया कि रमजान माह तीन अशरों पर आधारित है पहला रहमत जो एक दिन बाद पूरा होने वाला है दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम की आग से खुलासे का है। हमें चाहिए कि हम साल के 11 महीनों से हटकर ज्यादा से ज्यादा समय इबादत में गुजारे। आपके पास सिर्फ वर्तमान है आप एक दिन पहले गुजारा गया समय वापस नहीं ला सकते और एक दिन बाद क्या होना है वह नहीं जान सकते हैं।

आपकी निजात के लिए मालिक को राजी करने के लिए सिर्फ वर्तमान यानी हाल का दिन है जो अच्छे कार्य करना है कर ले जिन्दगी का चिराग कब बुझ जाए कोई नहीं जानता इसलिए जो भी इबादत करों या नमाज पढ़ो तो यह सोचकर पढ़ो कि यह मेरी आखरी नमाज है। ्रउन्होंने रमजान के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए बताया रमजान में एक माह मालिक को भूखा रखने का यह मकसद है कि आपको गरीबों की भूख प्यास का एहसास हो और आप हर जरूरतमंद की मदद करने वाले बन सको। जितनी भी इबादतें हैं उसमें थोड़ा बहुत दिखावा हो सकता है, लेकिन रोजा एक ऐसी इबादत है कि रोजा रखने वाले और मालिक को ही मालूम है कि कौन रोजे से है और कोन नहीं। इसलिए रमजान के बाकी दिनों की कद्र करों और अधिक से अधिक इबादत गरीबों की मदद व परोपकार के कार्य में समय लगाओ तभी रमजान माह का हक अदा हो सकेगा।

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