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न्यायालय का सहारा लिए बिना विवादों से निपटने का माध्यम है मध्यस्थता

मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रम है जिसमें पक्षकार किसी तीसरे व्‍यक्ति के हस्तक्षेप के माध्यम से तथा...

Danik Bhaskar | May 26, 2018, 03:15 AM IST
मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रम है जिसमें पक्षकार किसी तीसरे व्‍यक्ति के हस्तक्षेप के माध्यम से तथा न्यायालय का सहारा लिए बिना अपने विवादों का निपटान करवाते हैं। यह ऐसी विधि है जिसमें विवाद किसी नामित व्यक्ति के सामने रखा जाता है जो दोनों पक्षों को सुनने के बाद अर्ध-न्यायिक तरीके से मसले का निर्णय करता है। यदि विवाद नहीं भी सुलझता तो उससे प्रकरण में किसी प्रकार का असर नहीं पड़ता इसलिए लोगो को चाहिए के वे अपने मामले आपसी समझौते से हल करें और खुशहाल जीवन व्यतीत करें।

उक्त उदगार तहसील विधिक सेवा समिति द्वारा न्यायालय परिसर में आयोजित मध्यस्थता जागरूकता शिविर में विधिक सेवा समिति अध्यक्ष एवं जिला अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि समाधान समाधानकर्ता की सहायता से पक्षकारों द्वारा विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटान की प्रक्रिया है। यह मध्यस्थता से इस अर्थ में भिन्न है कि मध्यस्थता में अवार्ड तीसरे पक्षकार या मध्यस्थता न्यायाधिकरण का निर्णय है जबकि समाधान के मामले में निर्णय पक्षकारों का होता है। जिसे समाधानकर्ता की मध्यस्थता से लिया जाता है। विवाद समाधान की ऐसी विधियां कानूनी मुकदमे की तुलना में कई प्रकार से लाभप्रद हैं। न्यायालय में मुकदमे की तुलना में कम महंगे होते हैं और अत्यधिक सरल तथा त्वरित होते हैं। जिससे दोनों पक्षकार समय के अपव्यय से बचते हैं। चूंकि कार्यवाहियां बंद दरवाजे में संचालित की जाती हैं, विवाद का प्रचार नहीं होता जिसमें गोपनीयता सुनिश्चित होती है। शिविर में वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी दुबे, अभिभाषक संघ के नव निर्वाचित अध्यक्ष श्यामनारायण रावत ने भी मध्यस्थता के कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पक्षकारों की उनके विवाद का सद्भावपूर्ण निपटान करने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से मदद करना है मामले की परिस्थितियों और पक्षकारों की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त विधि से समाधान कार्रवाइयों का संचालन करना आदि है। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता बद्रीविशाल गुप्ता ने संचालन करते हुए मध्यस्थता के बारे में प्रकाश डाला और आभार व्यक्त किया। शिविर में रमेश प्रसाद सोनी, मूरतसिंह ठाकुर, गुफरान अली, ओपी त्रिवेदी, राजेन्द्र सोलंकी, विनय खरे, संजीव सोनी, किशोरीलाल चौरसिया, सहित अन्य अधिवक्तागण व पक्षकार गण मौजूद थे।