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5 दिन में सरिए की कीमत 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी, पीएम आवास बनाना महंगा

निर्माण सामग्री के दामों में आए भारी उछाल ने मकान बनवा रहे लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले पांच दिनों में दामों में 10...

Danik Bhaskar | Apr 14, 2018, 03:20 AM IST
निर्माण सामग्री के दामों में आए भारी उछाल ने मकान बनवा रहे लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले पांच दिनों में दामों में 10 प्रतिशत तक की तेजी आ गई है। इससे अपना घर बना रहे लोगों का गणित गड़बड़ा गया है।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के काम ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में चालू हो जाने से सामग्री की मांग में अत्यधिक बढ़ गई है। साथ ही सरिए में कच्चे माल की आपूर्ति में आई कमी से इसकी कीमत में इजाफा हो गया। क्षेत्र की बात करें तो यहां प्रधानमंत्री आवास योजना में जहां ग्रामीण क्षेत्र में काम चल रहे है वहीं नगरीय क्षेत्र में भी करीब एक हजार आवास की राशि खातों में डलने ही वाली है। इतनी बड़ी तादाद में मकान बनाने के लिए उतनी ही निर्माण सामग्री की जरूरत पड़ेगी। लिहाजा सरिए के साथ रेत की कीमतों में भी अचानक से बढ़ोतरी हो गई है। सरिए का भाव 4600 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 4800 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। इसका सीधा असर मकान निर्माण की लागत पर पड़ेगा। इससे नए मकान का निर्माण करने की योजना बना रहे लोगों को भी झटका लगा है। उन्हें अपना बजट फिर से व्यवस्थित करना होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना में सैकड़ों आवास स्वीकृत होने के बाद मिस्त्री और मजदूर अब गांव में खुद के मकान बनाने में लगे हैं। जिसके चलते नगरीय क्षेत्र में मजदूर नहीं मिल पा रहे। कई साइट बंद हो गई हैं। बहुत से ठेकेदार सुबह-सुबह मजदूरों को तलाशते नजर आते हैं।

मकान निर्माण सामग्री में दस प्रतिशत की तेजी आने से बढ़ रही लोगों की समस्या

िनर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से मकान बनवा रहे लोगों की उड़ी नींद

सरिए के दाम बढ़ने से पीएम आवास निर्माण का बजट बढ़ा।

270 वर्गफीट में निर्माण तो 130 बोरी सीमेंट व 6 टन लगता है सरिया

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास का आदर्श आकार 270 वर्ग फीट है। रजिस्टर्ड ठेकेदार साजिद खान के मुताबिक एक आवास बनाने में करीब 135 बैग सीमेंट और 6 क्विंटल सरिया लगेगा। वर्तमान कीमत के हिसाब से 135 बैग सीमेंट के लिए करीब 40 हजार 500 रुपए देना होंगे। वहीं 6 क्विंटल सरिया 28 हजार 800 रुपए में पड़ेगा। यानी सीमेंट-सरिए के लिए ही 69 हजार 300 रुपए चुकाने होंगे। रेत और गिट्टी की कीमत अलग है।

बोरास से रेत नहीं आने से कीमतें बढ़ी

क्षेत्र में बालू रेत उदयपुरा के बोरास घाट से आती है। चूंकि नए वित्तीय वर्ष से रेत खदानों का संचालन ग्राम पंचायतों को सौंपने के निर्देश थे तो फिलहाल रेत आना बंद हो गई है। जिसके चलते 3000 रुपए में मिल रही एक ट्रॉली रेत के लिए लोगों को साढ़े चार हजार रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।

शहरी क्षेत्र में असर

तहसील में फोर लेन के काम के साथ कई भवनों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। इसके अलावा कई बड़े गांव हैं जहां बड़े पैमाने पर लोग मकान बना रहे हैं। लोक निर्माण विभाग भी कई पुल पुलियों का निर्माण ठेके पर करवा रहा है। ऐसे में सरिए की कीमत बढ़ने और रेत नहीं आने से इन सभी पर असर पड़ेगा।