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सरकार की नहीं तैयारी, यात्री वाहनों में सुरक्षा उपकरण लगाने की तारीख 1 साल बढ़ाई

परिवहन विभाग ने इस साल 1 अप्रैल से यात्रियों की सुरक्षा के लिए वाहनों में जीपीएस और पैनिक बटन लगाना अनिवार्य किया,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 25, 2018, 04:10 AM IST

परिवहन विभाग ने इस साल 1 अप्रैल से यात्रियों की सुरक्षा के लिए वाहनों में जीपीएस और पैनिक बटन लगाना अनिवार्य किया, लेकिन 18 दिन बाद ही (18 अप्रैल को) शासन ने फैसले को बदलते हुए इसकी समय सीमा एक साल बढ़ा दी, यानी अब यह 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी होगा। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि शासन के पास खुद इस व्यवस्था को लागू कराने के बाद मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं थी।

अभी तक कंट्रोल रूम ही नहीं बना पाए

1. परिवहन विशेषज्ञों की मानें तो शासन खुद इस व्यवस्था की मॉनिटरिंग की अब तक कोई व्यवस्था नहीं कर पाया था। वाहनों में पैनिक बटन और जीपीएस की ट्रैकिंग के लिए कंट्रोल रूम बनाए जाने थे, लेकिन अब तक नहीं बनाए गए। इसके कारण वाहनों में ये उपकरण लगे होने पर भी शासन स्तर पर उन पर नजर रख पाना और यात्रियों की मदद करना संभव नहीं है। इसे देखते हुए शासन ने एक साल का समय बढ़ाया है। आरटीओ रीतेश तिवारी ने बताया कि नया आदेश हमें मिल गया है। 1 अप्रैल 2019 तक सभी वाहनों को ये उपकरण लगवाने की सलाह दे रहे हैं।

2. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 28 नवंबर को नोटिफिकेशन जारी किया था कि देश के सभी लोक परिवहन वाहनों में जीपीएस और आपात स्थिति में मदद के लिए पैनिक बटन लगाए जाएं। इस व्यवस्था को 1 अप्रैल 2018 से पूरे देश में लागू किया जाना था। इसमें दो पहिया, तीन पहिया, ई-रिक्शा और ऐसे वाहन, जिनके लिए परमिट अनिवार्य नहीं है, को छूट दी गई थी। इस तरह कार टैक्सी से लेकर बसों तक में इन नियमों का पालन करना जरूरी था। 1 अप्रैल से सागर में इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया गया। इन उपकरणों के बिना आरटीओ में यात्री वाहनों के फिटनेस पर रोक भी लगा दी गई।

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