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3 साल बाद अधिक मास, 10 दिन पहले शुरू होंगे रमजान

अगले माह मई में दो धर्म के प्रमुख त्योहार इस बार एक साथ आ रहे हैं। 3 साल बाद हिंदुओं का अधिक मास आ रहा है तो मुस्लिमों...

Dainik Bhaskar

Apr 27, 2018, 04:10 AM IST
3 साल बाद अधिक मास, 10 दिन पहले शुरू होंगे रमजान
अगले माह मई में दो धर्म के प्रमुख त्योहार इस बार एक साथ आ रहे हैं। 3 साल बाद हिंदुओं का अधिक मास आ रहा है तो मुस्लिमों का पवित्र रमजान माह गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 10 दिन पहले शुरू हो जाएगा।

पूजा व इबादत के इस संयोग में दोनों धर्म के लोग एक साथ पर्व मनाएंगे। अधिक मास में मंदिरों- आश्रमों में लोग पूजा-पाठ, जप-अनुष्ठान और कथा-प्रवचन करेंगे तो रमजान में मस्जिदों में नमाज व इबादतों के साथ रोजे रखकर दुआ मांगने का दौर चलेगा। अधिक मास 16 मई से शुरू होकर 13 जून तक चलेगा। वहीं रमजान माह चांद दिखने पर 16 मई से शुरू होगा। पं. शिवनारायण शास्त्री ने बताया अधिक मास हर 3 साल में एक बार आता है। इसके पहले वर्ष 2015 में आषाढ़ मास में अधिक मास आया था। इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिक मास रहेगा।

मुस्लिम समाज के शहर काजी हाफिज अब्दुल मजीद खां ने बताया कि रमजान माह की शुरुआत चांद दिखने के साथ मानी जाती है। हर वर्ष हिजरी सन के हिसाब से दस दिन कम होते है इस हिसाब से हर मौसम में रमजान शरीफ आते है। और 36 साल में एक वर्ष का फर्क अंग्रेजी सन से होता है। जिस तरह सनातन धर्म में तीन साल में एक माह लोड़ का बढ़ा लिया जाता है। 2014 से 2016 तक रमजान माह जून माह में आया था। वर्ष 2017 में रमजान माह 28 मई से शुरू हुआ था। इस बार 10 दिन पहले यानी 16 मई को शुरू होगा।

धर्म

पूजा व इबादत का संयोग: मई माह में इस बार दो धर्मों के प्रमुख त्योहार एक साथ मनाए जाएंगे

मई में बनेगा अिधक मास का संयोग

दो धर्मों के त्योहार एक साथ, अधिक मास 16 मई से 13 जून तक चलेगा तो रमजान की शुरूआत भी 16 मई या 17 मई से शुरू होगी, 30 अप्रैल को वैशाख पूर्णिमा, एक मई को शब-ए-बरात यह भी संयोग रहेगा कि 30 अप्रैल को वैशाख पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा तो इसके अगले दिन शब-ए-बरात का त्योहार रहेगा। वैशाख पूर्णिमा हिंदुओं के लिए धर्म-कर्म, पूजा-पाठ, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य के लिए बड़ा पर्व माना जाता है। वहीं शब-ए-बरात का दिन मुस्लिम समाज के लिए खुदा की इबादत का मुख्य दिन होता है यह रातें बंदों के हिसाब किताब यानी बजट पेश करने की रात होती है। आने वाले वर्ष में किसकी मौत होना है, किसके जन्म लेना है, कुल मिलाकर जिंदगी के आने वाले सभी कार्यों दुख सुख सभी की लिस्ट बनकर उस पर मुहर लग जाती है। पूर्णिमा पर लोग स्नान-दान करेंगे तो अगले दिन मुस्लिमजन मस्जिदों में शब-ए-बरात पर इबादत कर दुआ मांगेंगे। नमाज के बाद रातभर जागकर इबादत करेंगे। कब्रिस्तानों में जाकर बुजुर्गों की कब्रों पर उनके लिए मगफिरत की दुआएं भी करेंगे। और अगले दिन का रोजा रखेंगे।

बाजार में हो रही तैयारी

अधिक मास और रमजान एक ही माह में आने से बाजारों में भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। रमजान माह में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज जन रोजे रखते हैं। इसी के मद्देनजर बाजारों में तैयारियां चल रही हैं। रमजान माह में सबसे ज्यादा खरीदी फलों की होती है इसलिए इस बार बाजार में ताजे और रसभरे फल बड़ी संख्या में आने की उम्मीद है।

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