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समझौते से दोनों पक्षों की जीत होती है : न्यायाधीश

समझौता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दोनों पक्षों की जीत होती है। कोई हारा हुआ नहीं होता और वर्षों की जो वैमनस्यता...

Danik Bhaskar

Apr 27, 2018, 04:10 AM IST
समझौता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दोनों पक्षों की जीत होती है। कोई हारा हुआ नहीं होता और वर्षों की जो वैमनस्यता होती है वह भी दूर हो जाती है। साथ ही समय और पैसे की बचत भी होती है।

उक्त उदगार न्यायालय परिसर में तहसील विधिक सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 1 विनोद पाटीदार ने पक्षकारों के समक्ष व्यक्त करते हुए समझौता राजीनामे की तहत किए जाने वाले कार्य और उसकी प्रक्रिया व कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पक्षकारों को कई प्रेरणादायक मामलों का सार भी प्रस्तुत किया कि किस तरह लोगों ने वर्षों पुराने मामलों में राजीनामा करके आनंदमय जीवन गुजार रहे है और दुश्मनी जो वर्षों पुरानी थी वह भी समाप्त हो गई है। उन्होंने पक्षकारों से आव्हान किया कि उनके जो मामले राजीनामा योग्य न्यायालय में चल रहे हैं उसे मध्यस्थता के जरिए हल कर राजीनामे करें। ताकि समय और पैसे की बचत होकर दुश्मनी समाप्त हो सके। शिविर की अध्यक्षता तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने की शिविर को कई वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी संबोधित किया। संचालन करते हुए एजीपी बद्रीविशाल गुप्ता ने भी मध्यस्थता विषय पर सारगर्भित उद्बोधन देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला अपर सत्र न्यायाधीश बलराम सिंह यादव, अधिवक्ता, ओपी दुबे, एम मतीन सिद्दीकी, राजकुमार गुप्ता, प्रभुदयाल नेमा, किशोरीलाल चौरसिया, सईदकमर खान, नरेंद्र भार्गव, शिवराज सिंह ठाकुर, श्याम रावत, हेमराज राठौर, शरीफ मंसूरी सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।

विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

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