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60 में से 12 पंचायतों के कई गांवों में जलसंकट,बैलगाड़ियों से ढो रहे पानी

ग्रामीण क्षेत्रों में 60 पंचायतों में से करीब दो दर्जन पंचायतों के गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। हालत यह हैं कि...

Danik Bhaskar | May 20, 2018, 04:20 AM IST
ग्रामीण क्षेत्रों में 60 पंचायतों में से करीब दो दर्जन पंचायतों के गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। हालत यह हैं कि लोगों को एक से दो किमी दूरी का सफर तय कर पानी ढोना पड़ रहा है। वहीं कई गांव तो ऐसे हैं जहां की महिलाएं एवं बच्चे जान जोखिम में डालकर पानी भरने को मजबूर हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ी इलाके के ज्यादातर हैंडपंप एवं ट्यूबवेलों ने दम तोड़ दिया है। तो कई का जल स्तर निचले स्तर पर पहुंच गया है। जिससे पेयजल की पूर्ति नहीं हो पा रही। कई गांवों में तो मात्र एक या दो हैंडपंप ही चालू हैं बांकी हैंडपंपों का पानी सूख चुका है। लोग खेतों में बने कुआें से पानी ढो कर ला रहे हैं। जिनके पास साधन नहीं है ऐसे परिवारों की महिलाएं बच्चे सिर पर खेप रखकर एक से दो किमी का सफर तय कर रहे हैं।

गांवों में अधिक गहराया जल संकट : घोघरी, कुण्डा, केशलोन, घाना कला, रतनहारी, पंदरभटा, मढ़िया गुसाई, खामखेड़ा, कोठीखोह, जमुनियाता, चौनपुरा, गोपई, गुलबाड़ा,झिरिया, ककरूआ, चौका, कल्याणपुर, खैरी, तिनघरा, भुरेरू, सेमरा, सहित तहसील के करीब 36 गांव भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं।

नल-जल योजना फ्लाप : ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 52 नल-जल योजनाएं हैं। जिनमें से कुछ नल-जल योजनाएं ऐसी भी हैं जो बनने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं और आधे से अधिक योजनाएं बंद पड़ी हैं। वहीं पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए अधिकांश हैंडपंप देखरेख के अभाव में बदहाल हो चुके हैं।

ग्रामीण बैलगाड़ियों में टंकियां रखकर खेत पर बनें कुओं से भरकर ला रहे पानी।

दो किमी दूर से ला रहे पानी

तहसील के पहाड़ी इलाके के नागरिकों को खेतों पर बने सिंचाई वाले कुओं एवं आसपास के नालों में खोदे गए कुओं से पानी टंकियों में लाकर गुजर बसर कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीण दो किलोमीटर दूर जंगली खंडर कुआं में से पानी खींचना पड़ता है और सर पे रखकर महिलाएं पानी ढोने को मजबूर हैं।