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जिस घर में एकादशी का व्रत होता है, वहां आसुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करती: शास्त्री

बेगमगंज| टप्पा सुल्तानगंज के ग्राम डुंगरिया में चल रही श्रीमद्‌ भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक बालकृष्ण...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 12, 2018, 05:15 AM IST

बेगमगंज| टप्पा सुल्तानगंज के ग्राम डुंगरिया में चल रही श्रीमद्‌ भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक बालकृष्ण शास्त्री ने भागवत कथा में कहा कि भक्त जिस नाम से पुकारे प्रभु वहीं बन जाते हैं। उन्होंने गोपियों और कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि गोपियों की आराधना से प्रसन्न होकर कन्हैया ने गोपियों से रास करने की बात कही। जैसे ही भगवान की बांसुरी का वादन सुना, अपनी सुध-बुध भूल गईं और दौड़कर आ गईं और श्रीकृष्ण के साथ रास रचाया। उन्होंने कहा कि जिस घर में एकादशी व्रत होता है उस घर में आसुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर सकतीं। त्रेता में अंगद, हनुमान, द्वापर में गोपियां, कलयुग में श्रीमद्भागवत श्रवण करने वाले श्रोता बड़भागी माने जाते हैं और यह सौभाग्य डुंगरिया वासियों को मिला है। रुक्मणि कृष्ण के फुफेरे भाई शिशुपाल के साथ विवाह नहीं करना चाहतीं थी, इसलिए उन्होंने कृष्ण को सात श्लोकी संदेश भेजा जिससे श्रीकृष्ण उनका हरण कर अपने साथ ले जा रहे थे, तभी रुक्मणि के भाई रुकमी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तब कृष्ण ने रूकमी पर सुदर्शन चक्र उठाया। उन्होंने आगे कहा कि रुक्मणि ने श्रीकृष्ण पर विश्वास का कारण था कि उन्होंने लाख मुश्किलों के बाद भी श्रीकृष्ण को स्वामी के रूप में पाया था। इस अवसर पर हिंदू रीति रिवाज से श्रीकृष्ण और माता रुक्मणि का विवाह संपन्न हुआ।

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