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आंखों से दिखाई नहीं देता, मन की आंखों से पहचान लेते हैं असली-नकली

बेगमगंज| नगर के पीराशाह मोहल्ले में 70 वर्षीय मिर्जा वसीम बेग दिव्यांग होने के बाद भी मन की आंखों से दुकान चला रहे...

Dainik Bhaskar

May 06, 2018, 05:20 AM IST
आंखों से दिखाई नहीं देता, मन की आंखों से पहचान लेते हैं असली-नकली
बेगमगंज| नगर के पीराशाह मोहल्ले में 70 वर्षीय मिर्जा वसीम बेग दिव्यांग होने के बाद भी मन की आंखों से दुकान चला रहे हैं। मिर्जा वसीम बेग की आखों की रोशनी बचपन से ही कम थी। फिर भी हौसले बुलंद रखते हुए उन्होंने कक्षा सातवीं तक पढ़ाई की। लेकिन पूरी तरह आंखों की रोशनी जाने के बाद पढ़ाई अधूरी रह गई। स्वाभिमानी होने के कारण उन्होंने अपने पिता भाई का सहारा न लेते हुए स्वयं अपने जीवन यापन के लिए एक दुकान खोली ली। लेकिन लाचारी के चलते वह अविवाहित रह गए। इनकी खासियत यह है कि वह दुकान में रखी हर एक चीज को छू कर पहचान लेते हैं और असली नकली नोट व कितने का नोट है यह भी छू कर पहचान लेते हैं। कई बार ऐसा हुआ कि लोगों ने मजाक में इधर की चीज उधर रख दी फिर भी उन्होंने उक्त चीज को ढूंढ निकाला। सिर्फ दुकानदारी नहीं बल्कि नल से पानी भरकर लाना, अपने कपड़े स्वयं धोकर प्रेस करना और अपनी दैनिक क्रियाएं स्वयं बखूबी कर लेते हैं और रोज अपनी दाढ़ी भी बनाते है।

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