बेगमगंज

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किसान बोले-हमें अंधेरे में रखकर बनाई बीना परियोजना

बीना परियोजना प्रभावित किसानों की महापंचायत बुधवार को सुमेर में हुई। प्रभावित किसानों ने बताया की डूब में आने...

Danik Bhaskar

Jul 12, 2018, 06:15 AM IST
बीना परियोजना प्रभावित किसानों की महापंचायत बुधवार को सुमेर में हुई। प्रभावित किसानों ने बताया की डूब में आने वाले गांव सेमरी जलाशय से सिंचित हैं। तुलसीपार जलाशय, कीरतपुर जलाशय, उमरखोह जलाशय, तथा बीना नदी पर बने चंदामाऊ खिरिया परासरी, बहेरिया घाट, मानकी सलैया, महूना गुजर बीना नदी पर हैं। बेरखेड़ी घाट, चंदोरिया घाट, सोंठिया घाट, मानपुर घाट, सेमरी नदी व दुधई नदी में, सागर रोड पर सुमेर में एक वैराज, बेगमगंज में जल संवर्धन का डेम, कोलुआ घाट पर डेम, बेगमगंज के पास डेम, सलैया घाट वैराज, रहटवास तथा नैनविलास वैराज, देवलापुर के पास दुधई नदी में डेम, मडदेवरा के पास डेम, मडिया के पास डेम तथा कोकलपुर तालाब ये सभी जलाशय डूब में आ रहे हैं। इसके चलते न केवल शासन का करोंड़ों रुपया बर्बाद होगा साथ ही सिंचित जमीन भी डूब जाएंगी।

प्रभावित किसानों ने शिकायत की कि उन्हें अंधेरे में रखकर परियोजना बनाई गई है। किसानों द्वारा चकरपुर एवं मडिया बांध के टेंडर निकाले जाने का विरोध किया। किसानों ने कहा कि हम बांध नहीं बनने देंगे। महापंचायत में 25 जुलाई तक सभी प्रभावित गांवों में किसान संघर्ष समिति बनाए का निर्णय किया गया। ग्रामवार समितियां गठित करने के लिए संचालन समिति का गठन किया गया। प्रभावित किसानों ने 16 जुलाई को राज्यपाल एवं जलसंसाधन मंत्री से मिलने का समय मांगा है।

सुमेर में किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय संयोजक डॉ सुनीलम ने कहा कि एक तरफ मडिया बांध के डूब क्षेत्र में भू.अर्जन की कार्रवाई के नोटिस तक नहीं दिए गए हैं दूसरी तरफ खुरई में भूमिपूजन कर दिया गया।

प्रभावित किसानों ने राज्यपाल से मांगा 16 जुलाई का समय

प्रदर्शन कर किसानों ने किया बीना परियोजना का विरोध।

75 गांव व 40 लाख पेड़ डूबेंगे

सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम सेन ने कहा कि जिन मतदाताओं ने मुख्यमंत्री को संसद तक पहुंचाया आज उनके द्वारा ही अपने ही क्षेत्र के 75 गांव को उजाड़ने का कार्य किया जा रहा है जो निंदनीय है। उन्होंने दावा किया कि उजाड़ने वालों को अब मतदाता नहीं छोड़ेंगे। परियोजना में 75 गांव तथा वन क्षेत्र के लगभग 40 लाख पेड़ डूबेंगे। जिनकी भरपाई अगले पचास वर्षों में भी नहीं की जा सकेगी। पार्षद मुन्ना दान ने कहा की हमने संघर्ष करके गत 15 वर्षों से परियोजना को रोका हुआ था ताकि 50 हजार की आबादी विस्थापित न हो लेकिन कल्याण और सेवा के नाम पर चुनी जाने वाली सरकार अपने ही किसानों को उजड़ने पर आमादा है।

किसानों से पानी छुड़ाकर कंपनियों को देने का प्रयास

मंडी सदस्य निर्भय सिंह ने कहा की में मंडी में किसानों का प्रतिनिधि हूं। उनके हितों के खिलाफ होने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करूंगा। सरकार किसानों से पानी छुड़ा कर कंपनियों को देना चाहती है यही कारण है की किसानों की सिंचाई के नाम पर बीना परियोजना बनाई जा रही है। जबकि उसका असली मकसद कम्पनियों को पानी देना है।

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