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कंडे की जलेगी होली, पलाश के फूलों से बिखरेंगे रंग

जल संकट और प्रकृति संरक्षण के उद्देश्य से इस बार होली का त्योहार सद्भाव के साथ मनाया जाएगा। पानी की कमी को देखते...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:15 AM IST
जल संकट और प्रकृति संरक्षण के उद्देश्य से इस बार होली का त्योहार सद्भाव के साथ मनाया जाएगा। पानी की कमी को देखते हुए लोग अबीर और गुलाल से होली खेलेंगे। गुरुवार को जगह-जगह होलिका दहन किया जाएगा। कहीं गोबर के कंडे तो कहीं नारियल की होली जलाने का निर्णय लिया है। भारत-भारती आवासीय विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए गोबर के कंडों की होली जलाई जाएगी तथा पलाश के फूलों के रंग बिखेरेंगे।

होलिका दहन आज

कल मनेगी धुरेंडी, भारत-भारती में 500 कंडों से किया होलिका का निर्माण

भारत - भारती आवासीय विद्यालय में छात्रों ने बनाई गोबर के कंडे की होली।

प्रकृति संरक्षण का दिया जाएगा संदेश

स्कूल के छात्रों में प्रकृति प्रेम और पर्यावरण की सीख देने वाले भारत-भारती आवासीय विद्यालय में होली प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए मनेगी। इसके लिए छात्रों ने गाय के गोबर के 500 कंडों से होलिका का निर्माण किया है।

बालाजीपुरम में शाम 7 बजे जलेगी होली

बालाजीपुरम में भी होलिका दहन होगा। मंदिर के पुजारी असीम पंडा ने बताया 6.15 मिनट पर बालाजी भगवान की आरती के बाद शाम 7 बजे सभी भगवान की चलित प्रतिमाओं को पालकी के साथ होलिका स्थल तक लाया जाएगा। यहां भगवान के बाद होलिका पूजन कर जलाई जाएगी।

गाय ही बचा सकती है पर्यावरण को

भारत-भारती आवासीय विद्यालय के सचिव मोहन नागर ने बताया गाय ही पर्यावरण को बचा सकती है। गोबर एक जैव पदार्थ है। इसलिए इसके जलने से प्रदूषण कम होता है। परिसर में पलाश के फूल (टेसू) को उबालकर रंग बनाया जाएगा।