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प्राइवेट स्कूल संचालक पुस्तक विक्रेता से सांठ-गांठ कर बेचते हैं पुस्तकें

प्राइवेट स्कूल के संचालक पुस्तक विक्रेता और प्रकाशक से सांठ-गांठ कर पुस्तकें तय कर लेते हैं। वह पुस्तक केवल एक ही...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:15 AM IST
प्राइवेट स्कूल के संचालक पुस्तक विक्रेता और प्रकाशक से सांठ-गांठ कर पुस्तकें तय कर लेते हैं। वह पुस्तक केवल एक ही दुकान पर उपलब्ध होती है। विक्रेता प्रिंट रेट पर पालकों को किताबें थमाता है। इससे नाराज जागरूक लोगों ने बुधवार को कलेक्टर शशांक मिश्र को ज्ञापन देकर प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए आए नागरिकों ने कलेक्टर को बताया पुस्तकों का एकाधिकार होने के कारण कई बार दुकानदार अभिभावकों के साथ दुर्व्यवहार करता है। साथ ही एकाधिकार होने के कारण स्कूल खुलने के कारण दुकानों में भीड़ भी अधिक होने से अभिभावकों को परेशानी होती है। सभी प्राइवेट, सीबीएससी बोर्ड, एमपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश प्रसारित करने की व्यवस्था करें कि सभी स्कूलों के संचालक अपने स्कूल के नए सत्र प्रारंभ होने से कम से कम एक माह पूर्व स्कूलों में चलने वाली सभी कक्षाओं की सभी पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करें। जिससे पुस्तकें एक से अधिक दुकानों पर उपलब्ध हो सके साथ ही एक ही दुकान से खरीदने की बाध्यता न हो। वहीं स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस की सूचना एक माह पूर्व स्कूलों के सूचना पटल पर चस्पा की जाए। ज्ञापन देते समय श्रीपाद निर्गुडकर, कैलाश वर्मा, अतीत पवार, मनीष धोटे, संजय शुक्ला, आशीष नरवरिया, आशीष देशमुख, विनय चौहान,कृष्णा वागद्रे, अनुराध मिश्रा मौजूद थे।