Hindi News »Madhya Pradesh »Betul» 15 हजार किसानों को नहीं हुआ 40 दिन के दूध का 70 लाख का भुगतान

15 हजार किसानों को नहीं हुआ 40 दिन के दूध का 70 लाख का भुगतान

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:15 AM IST

15 हजार किसानों को नहीं हुआ 40 दिन के दूध का 70 लाख का भुगतान
सबसे पहले दूध के सैंपल को हल्का-हल्का गरम करते हैं।

इसके बाद इसके दो भागों को अलग करते हैं। पहला मलाई यानी फैट और दूसरा सॉलिड नॉट फैट।

भुगतान नहीं होने के कारण शहर में दूध पैकेटों की हो सकती है शार्टेज

भुगतान अटकने के कारण, किसान गांव में ही बेच रहे दूध

भास्कर संवाददाता|बैतूल

दुग्ध उत्पादक 15 हजार किसानों के दूध का 70 लाख रुपए का भुगतान दुग्ध संघ ने रोक लिया है। इस कारण किसानों ने सांची दूध प्लांट को दूध देना कम कर दिया है। मार्च में प्रतिदिन दूध की आवक 4 हजार लीटर घट गई है।

आम लोगों के घरों में दूध की पूर्ति सांची दूध प्लांट के पैकेट से होती है। 1982 में यह प्लांट स्थापित हुआ था। यहां 188 दुग्ध समितियों से दूध आता है। आवक बीते कुछ सालों में लगातार बढ़ रही थी। लेकिन प्लांट में दूध की आवक एक महीने से लगातार गिर रही है। दरअसल दुग्ध संघ ने 188 दुग्ध समितियों का 20 फरवरी के बाद से 40 दिन का 70 लाख रुपए का भुगतान रोक दिया है। इस कारण अब दुग्ध समितियों से जुड़े किसानों ने भी प्लांट में दूध लाने की जगह गांव में ही बेचना शुरू कर दिया है। इस कारण फरवरी तक जो कलेक्शन 44 हजार लीटर प्रतिदिन था वह मार्च में 40 हजार लीटर ही रह गया है।

गाय-भैंसों को खिलाएंगे क्या, रुपए तो मिल ही नहीं रहे

दुग्ध समिति के माध्यम से दूध बेचने वाले किसान उमेश कड़वे ने बताया 40 दिन का पेमेंट नहीं हुआ है। पहले ही आमदनी कम है। ऐसे में अब गाय-भैंसों का चारा खरीदने के लिए भी रुपए नहीं है। डहुआ के धुरेन्द्र बारंगे ने बताया हमारे पास जमा पूंजी तो है नहीं, हर दिन की दूध बिक्री से जो मिलता है उससे परिवार चलाते हैं। पेमेंट नहीं होने के कारण आर्थिक स्थिति गड़बड़ा रही है। जो दाम मिल रहा है उस पर गांव में ही दूध बेच दे रहे हैं।

सांची दूध प्लांट में इस तरह होती है दूध की जांच

पिछले साल सॉलिड नॉट फैट कम पाए जाने पर नहीं लिया था दूध

सांची दूध प्लांट के 47 कलेक्शन सेंटर हैं। सांची दुग्ध प्लांट की लैब की जांच में पिछले साल 30 समितियों के दूध में सॉलिड नॉट फैट 8.5 प्रतिशत से कम पाया गया था। इसलिए कुछ समय तक इन समितियों का दूध नहीं लिया था। इसके बाद उन्हें क्वालिटी सुधारने को कहा था फिर दूध लेना शुरू कर दिया।

सॉलिड नॉट फैट का पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इस पाउडर का वजन करते हैं।

100 ग्राम दूध में 8.5 प्रतिशत एसएनएफ निकलने पर यह दूध शुद्ध माना जाता है।

किसान अपने गांव में ही बेच रहे दूध

डहुआ निवासी पूर्व संचालक भोपाल दुग्ध संघ बलराम बारंगे ने बताया दुग्ध उत्पादक किसानों को काफी समय से भुगतान नहीं किया जा रहा है। हमारे एरिया में तो 56 दिन का भुगतान नहीं किया है। राशि नहीं मिलने के कारण किसान अपने ही गांव में दूध बेच रहे हैं।

दुग्ध समितियों का भुगतान दुग्ध संघ भोपाल से ही होता है। पिछले कुछ समय से राशि नहीं आई है। जल्द ही राशि आ जाएगी। भुगतान तो किया ही जाएगा। एम सतीश, एजीएम, सांची दूध प्लांट

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Betul

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×