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गोंडवाना ने पहली बार गांवों में दिखाई मजबूती, भाजपा-कांग्रेस के आंकड़े फेल

3 वर्ष पहले
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निर्दलीय प्रत्याशी की उपस्थिति से आशंकित हैं दोनों प्रमुख दल
आमला विस में निर्दलीय भी बिगाड़ेंगे समीकरण

भास्कर संवाददाता | सारनी

आदिवासी बाहुल्य आमला-सारनी विधानसभाक्षेत्र में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने इस चुनाव में पहली बार ताकत दिखाई है। गांवों में जिस मजबूती से गोंडवाना उतरी थी उससे भाजपा और कांग्रेस के सारे आंकड़े फेल होते नजर आ रहे हैं। ऊपर से सारनी में मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी के होने के कारण दोनों प्रमुख दल परिणामों को लेकर आशंकित हैं।

आमला विधानसभा क्षेत्र यूं तो भाजपा का गढ़ माना जाता है। मगर, गांवों में इस बार अत्यधिक मतदान होने और इन क्षेत्रों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की बेहतर पकड़ ने सभी को पसीने ला दिए हैं। चुनाव के एक दिन पहले यानी 27 नवंबर को आमला में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की रैली को इस साल की सबसे बड़ी रैली बताया जा रहा है।

सारनी में भी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बड़ी संख्या में लोगों को रैली में जुटाया था। आदिवासी नेता बबलू नर्रे के मुताबिक क्षेत्र में करीब 42 हजार आदिवासी हैं। यदि यह आंकड़ा सही है तो गोंडवाना पार्टी बड़ी संख्या में वोट ले सकती है। आमला में कुल कुल मतदाता 2 लाख 7 हजार 33 मतदाता हैं। इसमें से 77 फीसदी यानी 1 लाख 58 हजार 98 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। अब फैसला इतने मतदाताओं में से ही होना है। पिछले चुनाव यानी 2013 में भाजपा के चैतराम मानेकर को 77,939 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस की सुनीता बेले को 38,377 वोट मिले थे। अंतर बड़ा था। मगर, इस बार गोंडवाना की मजबूती और भाजपा से बागी निर्दलीय प्रत्याशी मनोज डेहरिया के चुनाव मैदान में होने के कारण जीत-हार का अंतर कम हो सकता है।

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