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खंभे पर चढ़कर आदिवासी भगत ने की पूजा, मेघनाद मेले में देर रात तक रही भीड़, राठौर समाज के दो रिश्ते हुए तय

एक वर्ष पहले
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होली पर्व के साथ जिले में मेघनाद पूजन का क्रम शुरू हाे गया है। शहर के टिकारी क्षेत्र में बुधवार को पारंपरिक मेले का आयोजन हुअा। इस मेले में आदिवासी समाज के लोगों ने पहुंचकर मेघनाद की पूजा की। मेले में राठौर समाज ने परंपरा के अनुसार रिश्ते की बात भी तय की। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी मेघनाद मेले का आयोजन किया जाएगा।

टिकारी में लगे मेघनाद मेले में राठौर समाज की रिश्ते तय करने की परंपरा है। मेले के दिन आसपास के राठौर समाज के लोग पूर्व पार्षद महेश राठौर के निवास पर एकत्रित हुए। यहां पर होली मिलन समारोह के बाद रिश्ते की बात तय की गई। राठौर ने बताया मेघनाद मेले में आसपास के राठौर समाज के लोगों यहां एकत्र हुए। उन्होंने बताया समाज की परंपरा है कि इस दिन समाज के लोग एकत्रित होकर शादी की बात तय करते हैं। आज भी आमला, पाढर, चिचोली तथा टिकारी के समाज के लोगों ने दो रिश्ते तय किए।

नहीं घुमाई जैरी, खंभे पर चढ़कर की पूजा टिकारी में लगे मेघनाद मेले में आदिवासी के लोगों ने पहुंचकर यहां लगे मेघनाद (लकड़ी के खंभे) की पूजा की। उन्होंने बताया इस मेले का इतिहास 100 साल से अधिक पुराना है। इस क्षेत्र में पहले आदिवासी समाज के लोग ही रहते थे। आदिवासियों ने अपने आराध्य मेघनाद की पूजा विशेष विधि विधान से की। आदिवासी भगत ने यहां करीब 50 फिट के खंभे पर चढ़कर पूजा की। उन्होंने बताया मेघनाद का खंभा पुराना होने से भगत ने जैरी नहीं घूमाई।

मेले में लगाया स्वास्थ्य शिविर जिला आयुष अधिकारी डॉ. अमृतराव बर्डे ने बताया मेघनाथ चौक पर शिविर में आयुर्वेद एवं होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति द्वारा मरीजों का उपचार किया गया। इस दौरान 581 मरीजों की जांच कर निशुल्क औषधियों का वितरण किया।

बैतूल। मेले में आदिवासी समाज के लोग मेघनाद की पूजा करते हुए।
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