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महिला दिवस पर केवि में हुआ कार्यक्रम - दीवारें ऊंचीं हैं, गलियां हैं तंग... जैसे गीताें ने भरा जाेश

एक वर्ष पहले
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शनिवार काे केंद्रीय विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन िकया। इस दाैरान अलग-अलग स्तर पर कार्यक्रम हुए। इस अवसर पर प्राचार्य ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विषय पर अपनी बात रखी। उन्हाेंने कहा कि नारी उपयोगी परिश्रम करके देश की प्रगति में योगदान तो दे ही रही हैं। साथ ही परिवार की आर्थिक समृद्धि भी बढ़ा रही हैं।

इस प्रकार सुयोग्य बनकर रहने पर गौरवान्वित अनुभव कर रही हैं। परिवार को सुरक्षित पुष्पों से भरा उद्यान बनाने में सफल हो रही हैं। उन्हाेंने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं का स्थान सदैव सर्वोपरि रहा है। प्राचार्य ने सभी को महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना रखने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का संयोजन शिक्षक धनराज भालेराव ने किया। कार्यक्रम के बाद स्कूल में कार्यरत महिलाओं के सम्मान किया।

स्कूली छात्राअाेंे ने किया प्रेरित

कार्यक्रम में 11वीं की छात्रा तनुश्री धोटे ने महिला दिवस का महत्व समझाया।

6वीं की छात्रा काव्या और आशी ने भारत की सफल महिलाओं के बारे में वर्णन किया। 6वीं की छात्रा तन्वी धारकर ने मदर टेरेसा के सेवा कार्य और सभी के प्रति समर्पित भाव से सभी को अवगत कराया। इसके बाद कक्षा 11वीं की छात्रा रिशिका हुरमाड़े ने प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के बारे में बता कर सब को प्रेरित किया। 9वीं की छात्रा कार्तिका यादव ने महाराष्ट्र की प्रथम महिला शिक्षिका और सभी वर्गों की स्त्रियों की शिक्षा की प्रबल समर्थक सावित्री बाई फुले के कार्यों से अवगत कराते हुए स्त्री शिक्षा की प्रेरणा दी।

सारनी। केंद्रीय स्कूल में महिला दिवस पर सम्मानित करते हुए।

दीवारें ऊंचीं हैं गलियां हैं तंग

स्कूल की संगीत शिक्षिका शारदा प्रजापति और विज्ञान शिक्षिका अंजु वर्मा ने महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा देने वाला “दीवारें ऊंची हैं गलियां हैं तंग, लंबी डगर है हिम्मत है संग, बेखौफ आजाद जीना है मुझे” सुंदर गीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर स्कूल के प्राचार्य हरिप्रसाद धारकर ने सफाई कर्मचारियों सहित स्कूल की सभी महिला कर्मचारियों को उपहार देकर सम्मानित किया।
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