न तराई, न गुणवत्ता; 130 करोड़ की रोड पर बैतूल शहरी क्षेत्र में बन रहे डिवाइडर सात दिन में तिड़के

Betul News - शहर के बीच से बनाई जा रही केन्द्रीय सड़क निधि की सीसी राेड के बीच में भीषण गर्मी में घटिया रोड डिवाइडर बनाए जा रहे...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 06:51 AM IST
Betul News - mp news no terrain no quality divine divider in the city of betul urban area on the road of 130 crores in seven days
शहर के बीच से बनाई जा रही केन्द्रीय सड़क निधि की सीसी राेड के बीच में भीषण गर्मी में घटिया रोड डिवाइडर बनाए जा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के आला अधिकारियों को अच्छी तरह पता है कि 40 डिग्री से ज्यादा तापमान में सीमेंट-कांक्रीट का काम करने से दरारें आती हैं इसके बावजूद बिना तराई के धड़ल्ले से काम किया जा रहा है। नए बने डिवाइडरों का सीमेंट-कांक्रीट सुरक्षित रखने के लिए भीषण गर्मी में गीले बारदाने तक नहीं डाले जा रहे हैं। नतीजा यह हो रहा है कि चक्कर रोड से विकास नगर तक की सड़क पर बने रोड डिवाइडरों में दरारें ही दरारें उभर आई हैं। बनने के साथ ही ये टूटकर बिखरने की स्थिति में आ गए हैं। लेकिन अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

चक्कर रोड से छिंदवाड़ा बार्डर के नागदेव मंदिर तक 72 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। इसमें 6 किलोमीटर हिस्सा शहर के बीच से निकला है। इसमें रोड डिवाइडर बनाए जा रहे हैं। नियमित तराई नहीं करने से डिवाइडर ढहने लगे हैं। कई जगह इसके टुकड़े निकल गए हैं।

बैतूल। सड़क पर बनाए जा रहे डिवाइडरों पर इस तरह जगह-जगह दिख रहीं दरारें।

सड़क की तराई तो खूब की, डिवाइडरों पर नहीं है ध्यान

पीडब्ल्यूडी के ठेके पर काम कर रही एमकेसी कंपनी ने सीसी सड़क निर्माण पर तो पूरा ध्यान दिया। सीसी सड़क पर बारदाने बिछाकर तराई करवाई। हर समय बारदानों को गीला रखा गया। लेकिन डिवाइडरों की तराई का ध्यान नहीं है।

डिवाइडरों पर नहीं रखे बारदाने, सात घंटे बाद से तराई करना होता है जरूरी

विकास नगर और आकाशवाणी रोड के हाल ही में बने रोड डिवाइडरों के बीच तो बारदाने तक नहीं रखे गए हैं। नियमित तराई भी नहीं की जा रही है। जबकि डिवाइडर बनने के 7 घंटे के बाद से ही तराई शुरू हो जानी चाहिए। यदि सड़क की तरह बारदाने रखकर इन्हें गीला कर दिया जाता तो लंबे समय तक बिना सींचे तराई होती रहती।

ऊंचाई से निर्माण सामग्री गिराने से भी अा रही दरारें

रोड डिवाइडर बनाने के दौरान सांचों को सड़क के बीच रखा जाता है। इसके बाद मिक्सर मशीन से ऊपर से मटेरियल डाला जाता है। अधिक ऊंचाई से मटेरियल गिराए जाने के कारण रेत, गिट्टी और सीमेंट अलग-अलग हो जाते हैं। इससे भविष्य में दरारें आती हैं।

डिवाइडर बनाने राजकोट से लाए हैं सांचे

एमकेसी कंपनी ने 10 इंच ऊंचे डिवाइडर बनाने के लिए गुजरात के राजकाेट से 2 सांचे बुलवाए हैं। डिवाइडर बनाने के लिए इन सांचों को सड़क के बीच छोड़ी गई जगह पर रखकर इसमें सीमेंट-कांक्रीट का मटेरियल भरा जाता है।

ठेकेदार काे दरारें नहीं अाएं एेसी हिदायत देंगे


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