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महिला काे शिक्षित बनाने अाैर अधिकार दिलाने में फुले का रहा बड़ा याेगदान : गाेलइत

एक वर्ष पहले
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त्रिर| बुद्ध विहार में संघमित्रा महिला मंडल ने बुधवार की रात में सावित्रीबाई फुले की 123वीं पुण्यतिथि मनाई। इस दाैरान सामूहिक बुद्ध वंदना की। संघमित्रा महिला मंडल की सदस्य आयुष्मति इंदु बाई गोलइत ने कहा कि सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारक व युवा मराठी कवियत्री थी। उन्हाेंने अपने पति ज्योति राव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों अाैर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। आयुष्यमति सविता सिरसाट ने कहा कि वह प्रथम महिला शिक्षिका थी, उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। सन् 1848 में बालिकाओं के लिए एक स्कूल की स्थापना उन्हाेंने की थी। महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने का याेगदान सावित्रीबाई का है। उनके संरक्षक अाैर गुरु ज्योति राव फुले थे। सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह जिया। इसका उद्देश्य था, विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। 10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया। समिति की तरफ से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस माैके उपासिकाओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस माैके पर आयुष्यमति मनोरमा हुमने, सत्यकला मेश्राम, सीता नागले, सुशीला, राऊत, सविता सिरसाठ, शीला वाहने, कंचना ढोके, विमल बाई पाटिल समेत अन्य लाेग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नीलिमा मुझमुले ने किया।

सारनी। सावित्रीबाई फुले की 123वीं पुण्यतिथि मनाई।
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