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धर्म और पर्यावरण की रक्षा : जल कलश, 500 फीट लंबी चुनरी लेकर ताप्ती दर्शन पद यात्रा शुरू

Betul News - मां ताप्ती के उद्गम स्थल से बुधवार को जयकारों के साथ ताप्ती दर्शन पदयात्रा शुरू हुई। उद्गम स्थल से निकली पदयात्रा...

Jan 16, 2020, 08:40 AM IST
Multai News - mp news protection of religion and environment water vase tapti darshan yatra started with 500 feet long chunri
मां ताप्ती के उद्गम स्थल से बुधवार को जयकारों के साथ ताप्ती दर्शन पदयात्रा शुरू हुई। उद्गम स्थल से निकली पदयात्रा 34 दिनों में 1 हजार किमी का सफर तय करते हुए संगम स्थल सूरत (गुजरात) पहुंचेगी। सुबह 8 बजे पदयात्रियों ने मां ताप्ती का पूजन और सरोवर का जल कलश में भरकर यात्रा शुरू की।

यात्रा में पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे और पूर्व नपा अध्यक्ष हेमंत शर्मा हाथों में ध्वज लेकर आगे चल रहे थे। बाजे-गाजे के साथ पदयात्री हाथों में 500 फीट लंबी चुनरी लेकर ताप्ती सरोवर की परिक्रमा लगाते हुए मरही माता मंदिर पहुंचे। रास्ते में शाह अल्वी मुस्लिम समाज सहित अन्य संगठनों ने यात्रा का स्वागत किया। पदयात्रियों के साथ यात्रा में समिति के जिलाध्यक्ष जितेंद्र कपूर, केके पांडे, राजेश दीक्षित, पूर्व कलेक्टर डीएस राय, रिटायर्ड मेजर प्रभाकरसिंह भोपाल, रोजगार निर्माण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष हेमंत विजय राव देशमुख भी शामिल थे।

मरही माता मंदिर में शिव माहोरे, संजय यादव, किशोर परिहार, सुमित शिवहरे, मनोज साबले, भिवजी पवार सहित अन्य ने पदयात्रियों का स्वागत कर भोजन कराया। पीएचई मंत्री पांसे ने पदयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा मां ताप्ती की सेवा में मप्र की पूरी सरकार हाजिर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मां ताप्ती के पुनर्जीवन, उत्थान विकास के लिए ताप्ती न्यास का गठन कर दिया है।

पहले दिन तय हुआ 30 किमी का सफर

ताप्ती दर्शन पद यात्रियों ने पहले दिन 30 किमी का सफर तय करते हुए बोरगांव (श्रावणतीर्थ) पहुंचे। पदयात्री मरही माता मंदिर से ज्ञानेश्वर शिव मंदिर पहुंचे। इसके बाद सांडिया जोड़ होते हुए ताईखेड़ा पहुंचे। जहां पदयात्रियों ने दोपहर का भोजन किया। इसके बाद यात्रा अगले पड़ाव बोरगांव के लिए रवाना हुई। जहां रात्रि विश्राम किया।

14 साल में बदला ताप्ती तट का स्वरूप : समिति के राजू पाटनकर ने बताया ताप्ती दर्शन पदयात्रा 2006 में शुरू हुई थी। ताप्ती नदी के किनारे स्थित गांवों से होते हुए पदयात्री संगम स्थल तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों को ताप्ती का महत्व, गांव को साफ और नदी को प्रदूषण से बचाने की समझाइश देते हैं।

मुलताई। ताप्ती उद्गम स्थल से शुरू हुई मां ताप्ती दर्शन पदयात्रा।

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