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रंगपंचमी पर मेघनाद बाबा को चढ़ाया झंडा, आदिवासी समाजजनों ने की पूजा-अर्चना

एक वर्ष पहले
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भाैंरा। रंगपंचमी पर मेघनाद की पूजा-अर्चना करते हुए।

भाैंरा| बुराई के प्रतीक रावण के बाहुबली पुत्र मेघनाद को आदिवासी न केवल अपना आराध्य मानते हैं, बल्कि उन्हें पूजते भी हैं। रंग पंचमी के दिन मेघनाद के नाम पर बाकायदा एक मेले का आयोजन हाेता है। मेघनाद को पूजने के लिए यह मेला गांव के बीचाें बीच रंग पंचमी पर्व पर लगाया जाता है। इसमें आदिवासियों के भुमका मेघनाद बाबा की पूजा अर्चना की जाती है। शनिवार काे रंग पंचमी पर मेघनाद बाबा को झंडा चढ़ाया गया। क्षेत्र के आदिवासी समाज के लाेगाें ने यहां पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। क्षेत्रावासियाें के अनुसार यह मेला आजादी से पहले से भरता चला आ रहा है। पहले यह क्षेत्र का सबसे बड़ा मेघनाद मेला था। इस मेले में पहले कई गांव के आदिवासी जुटते थे, लेकिन समय के साथ संख्या कम हाेते जा रही है। अब यह सिर्फ मेघनाद पूजन तक सीमित हाेकर रह गया है। मेघनाद की कोई प्रतिमा नहीं हाेती है। यहां 20 फीट ऊंचाई वाले खंभे हाेते हैं। इस खंभे पर चढ़ने के लिए करीब 15 फीट की खूंटी लगाई जाती है। एक तरह से यह मचान तैयार हो जाती है। इस पर तीन लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाती है। रंग पंचमी के दिन आदिवासी समाज के लाेग इसी मेघनाद रूपी खंभे के नीचे पूजा-अर्चना करते हैं।
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