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अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाना था, हिंदी में पढ़ा रहे शिक्षक

स्कूलों में गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के लिए शासन द्वारा नित नई- नई योजनाएं बनाई जाती हैं पर इनका धरातल पर ठीक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:20 AM IST

स्कूलों में गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के लिए शासन द्वारा नित नई- नई योजनाएं बनाई जाती हैं पर इनका धरातल पर ठीक प्रकार से क्रियान्वयन न होने से छात्र- छात्राओं को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल प्राइवेट स्कूलों की भांति सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने के जिले के 11 प्राइमरी एवं मिडिल स्कूलों को चिन्हित किया गया। लेकिन इनमें समूचा सत्र गुजर जाने के बाद तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षकों की व्यवस्था नहीं कराई जा सकी। अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण कराने के उद्देश्य इन स्कूलों में बच्चों को भर्ती कराने वाले अभिभावक भी खासे नाराज हैं। कई ने बच्चों को इन स्कूलों से निकालने का भी मन बना लिया है।

मनमानी

अंग्रेजी माध्यम के खोले गए 11 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में नहीं हो सकी शिक्षकों की पदस्थापना

अंग्रेजी स्कूल बनाए गए

जिले में अंग्रेजी माध्यम के बनाए गए स्कूलों में भिंड में काटनजीन क्रमांक एक, मेहगांव में गर्ल्स प्राइमरी एवं मिडिल स्कूल, ऊमरी में प्राइमरी स्कूल, हवलदारसिंह का पुरा में प्राइमरी स्कूल, पुरानी बस्ती में प्राइमरी स्कूल, मसूरी में प्राइमरी स्कूल, अटेर में मिडिल स्कूल, बैसपुरा मिडिल स्कूल, गोहद में गर्ल्स मिडिल स्कूल व मढ़ी जैतपुरा मिडिल स्कूल को शामिल थे।

पढ़ाना था अंग्रेजी में, साल भर पढ़ाई कराई हिंदी में

अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई के लिए घोषित किए गए 11 स्कूलों में भिंड एवं मेहगांव के दो स्कूलों में जरूर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षकों की व्यवस्था की गई। अन्य स्कूलों में पूर्व से पदस्थ शिक्षकों ने वर्षभर हिंदी माध्यम से पढ़ाया लिखाया। इससे न केवल छात्राें बल्कि अभिभावकों में भी रोष व्याप्त है। बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने बनी योजना पर प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ। यह भी नहीं सोचा गया कि बच्चों के कोमल मन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अब शिक्षकों के लिए एम- शिक्षा मित्र एप के जरिए ई- अटेंडेंस प्रक्रिया शुरू होने जा रही है तब इन शिक्षकों के सामने भी पदस्थी स्थल से उपस्थिति दर्ज कराने की समस्या रहेगी। क्योंकि विभाग द्वारा इधर- उधर के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने के लिए व्यवस्था बनाई थी। इनके पद स्थापना संबंधी आदेश जारी नहीं किए गए थे।

जल्दी ही कार्रवाई की जाएगी

अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हुई है। शुरूआती दौर में काउंसलिंग कराकर दो स्कूलों में व्यवस्था करा दी गई थी। ई- अटेंडेंस की प्रक्रिया शुरू होने पर इन शिक्षकों को भी यथास्थिति में पहुंचना होगा। इस बारे में मार्गदर्शन मांगा जाएगा और जल्दी ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। -संजीव कुमार शर्मा, परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र, भिंड

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Web Title: अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाना था, हिंदी में पढ़ा रहे शिक्षक
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