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विवेकानंद स्कूल भी सील, आज यदि प्रवेश पत्र नहीं बांटे तो होगी कार्रवाई

बोर्ड परीक्षा: 12वीं के 177 छात्रों के विकलांग कोटे से फार्म भरने का मामला भास्कर संवाददाता। भिंड माध्यमिक...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:10 AM IST
बोर्ड परीक्षा: 12वीं के 177 छात्रों के विकलांग कोटे से फार्म भरने का मामला

भास्कर संवाददाता। भिंड

माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की हायर सेकेंडरी की परीक्षा में विकलांग कोटे से 177 छात्रों के परीक्षा फार्म भरवाने वाले तीसरे स्कूल विवेकानंद हायर सेकेंडरी विद्यालय खेरिया को भी कलेक्टर डॉ इलैया राजा टी ने सील करवा दिया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट रूप से आदेश दिए है कि जिन स्कूलों ने छात्रों को प्रवेश पत्र नहीं बांटे हैं वे आज रविवार को प्रवेश पत्र बांट दें। यदि सोमवार को किसी भी स्कूल की यह शिकायत मिली कि छात्र को प्रवेश पत्र नहीं मिला है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की परीक्षाएं एक मार्च से प्रारंभ हो गई है। हायर सेकेंडरी के पहले पेपर में कुछ केंद्रों पर फर्जी तरीके से 177 विकलांग कोटे से परीक्षा फार्म भरने वाले परीक्षार्थी सामने आए, जिन्हें परीक्षा में शामिल होने नहीं दिया गया। वहीं कलेक्टर डॉ इलैया राजा टी ने यह फर्जीवाड़ा करने वाले शिवम हायर सेकेंडरी स्कूल कनावर और पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल नयागांव को तत्काल सील करवा दिया गया था।

इसके बाद देर शाम को तीसरा विद्यालय विवेकानंद हायर सेकेंडरी स्कूल भी सील्ड करवा दिया गया है। साथ ही इनका रिकार्ड भी तलब किया है। इस मामले में यह बात भी निकलकर सामने आई थी कि छात्रों को प्रवेश पत्र एनवक्त पर मिलने की वजह से वे भी इसकी शिकायत नहीं कर पाए थे।

ऐसे में कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से आदेश दिए हैं कि कोई भी स्कूल फीस अथवा अन्य किसी भी वजह से छात्रों के प्रवेश पत्रों को नहीं रोकेगा।

हर हाल में 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र दें स्कूल संचालक: कलेक्टर

रविवार तक हर हाल में हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी छात्र छात्राओं को प्रवेश पत्र मिल जाना चाहिए। इसके बाद यदि शिकायत मिलती है तो संबंधित स्कूल जांच कराई जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने बताया कि स्कूल संचालकों की बैठक में यह बात पहले ही उन्हें बता दी गई थी कि छात्रों को परीक्षा प्रारंभ होने के सात दिन पहले प्रवेश पत्र बांट दिए जाएं। ताकि उसमें यदि कोई गड़बड़ी अथवा त्रुटि है तो वे उसका सुधार करवा सकें। लेकिन स्कूल संचालकों द्वारा इसका पालन नहीं किया गया। परिणामस्वरूप 177 छात्र विकलांग कोटे से होने की वजह से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।