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गौरी सरोवर में कचरा और गंदे पानी से मर रहीं मछलियां

गौरी सरोवर के आसपास के घरों और बाजारों का कचरा उसमें फेंका जा रहा है। साथ ही नाले-नालियों का गंदा भी इसमें मिल रहा...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:15 AM IST
गौरी सरोवर के आसपास के घरों और बाजारों का कचरा उसमें फेंका जा रहा है। साथ ही नाले-नालियों का गंदा भी इसमें मिल रहा है। जिससे तालाब में छोड़े जा रहे गंदे पानी के कारण हजारों मछलियां मर रही हैं। वहीं बुधवार को सरोवर में सैकड़ों मछली और कछुआ मरी हुई हालत में पानी के ऊपर तैरते हुए दिखाई दिए। इसके अलावा नगर पालिका द्वारा सरोवर के सौंदर्यीकरण के लिए साल 2014-15 में आठ करोड़ रुपए की बजट की मंजूरी दी गई। लेकिन उसके बाद भी गौरी सरोवर बदहाल स्थिति में है।

गौरतलब है कि वर्षों से शहर के राजनेता सरोवर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण कराने के वादे करते रहे हैं, लेकिन सरोवर की हालत जैसी पहले थी वैसी ही अभी भी बनी हुई है। तालाब के आसपास के क्षेत्र के नाले नालियों के अलावा भी अन्य बड़े नालों का गंदा पानी भी इसमें रहा है। लेकिन नगर पालिका इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। इसका खामियाजा सरोवर के आसपास रहने वाले लोग भुगत रहे हैं। सरोवर के पास मीट मंडी और घरों से निकलने वाला कचरा इसी में फेंका जा रहा है। इस कारण से सरोवर का पानी जहरीला हो गया है।

अनदेखी

नगर पालिका द्वारा सरोवर के सौंदर्यीकरण के लिए 2014-15 में 8 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया, फिर भी बदहाल है गौरी सरोवर

सरोवर के पानी में उतराती मिलीं मरी हुईं मछलियां

सरोवर में नाले-नालियों और मीट मंडी का कचरा जमा होने से उसका पानी गंदा और जहरीला हो गया है। जिसके तहत बुधवार की सुबह गौरी सरोवर के पानी में सैकड़ों की संख्या में मछली और कछुआ मरी हुई हालत में तैरते हुए दिखाई दिए। मरे हुए जलीय जीवों के बारे में स्थानीय लोगों और वार्ड पार्षद ने नगर पालिका अधिकारियों को सूचना दी। साथ ही नगर पालिका वाट्सएप ग्रुप पर भी मरी मछलियों और सरोवर के अंदर पसरी गंदगी के फोटो डाले गए। उसके बाद भी सरोवर के अंदर से मरी मछलियों और गंदगी की सफाई नहीं कराई गई।

सौंदर्यीकरण के लिए आठ करोड़ की मंजूरी

नगर पालिका ने साल 2014-15 में गौरी सरोवर के सौंदर्यीकरण के लिए तीन करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई थी। बाद में इस बजट की राशि को बढ़ाकर आठ करोड़ कर दिया गया। उसके बाद भी गौरी सरोवर की स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा सुरक्षा के लिए सरोवर के चारों ओर दो साल पहले बाउंड्रीवाल बनाई गई थी। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान घटिया मटेरियल का उपयोग होने से अधिकांश बाउंड्रीवाल जर्जर हो चुकी है। वहीं दीवार का कुछ हिस्सा धराशायी होकर पानी के अंदर समा चुका है।

सरोवर पर विकास कार्य नहीं कराए