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तीन दिन से चल रही हड़ताल के बाद आज समय से बच्चों को लेने घर पहुंचेंगे स्कूल वाहन

तीन दिन से चल रही स्कूल वाहन संचालकों की हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। स्कूल संचालक और वाहन संचालकों के आपसी...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:10 PM IST
तीन दिन से चल रही स्कूल वाहन संचालकों की हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। स्कूल संचालक और वाहन संचालकों के आपसी समझौते के बाद आज सुबह स्कूल वाहन बच्चों को लेने उनके घर पहुंचेंगे। साथ ही अब दूरी के हिसाब से किराया निर्धारित होगा। इसके लिए स्कूल प्रबंधन अभिभावकों की बैठक में यह प्रस्ताव रखेगा। साथ ही प्रशासन ने भी अभिभावकों से इसमें सहयोग करने की अपील की है।

स्कूल वाहनों की हड़ताल खत्म, कलेक्टर ने कहा-भले ही 10% किराया बढ़ा लो, लेकिन ओवरलोडिंग नहीं करने देंगे

कलेक्टर डॉ इलैया राजा टी की अध्यक्षता में बुधवार की दोपहर 12.30 जिला पंचायत सभागार में स्कूल संचालक और वाहन संचालकों की समन्वय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में स्कूल संचालक और वाहन संचालकों द्वारा गिनाए गए खर्चों के बाद वाहन शुल्क में वृद्धि का निर्णय लिया गया। इसके लिए कलेक्टर ने कहा कि स्कूल प्रबंधन पेरेंट्स टीचर मीटिंग में इस मसले को रखे। आपसी समन्वय से वाहन शुल्क में वृद्धि करे। वहीं स्कूल संचालक भी अपने मुनाफे में कमी करें। साथ ही यह भी बात आई कि किराए में 10 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि नहीं की जा सकती है। वहीं प्रशासन ने भी अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर वे भी इसमें सहयोग करें। बैठक में जिला परिवहन अधिकारी अर्चना परिहार, जिला शिक्षा अधिकारी एसएन तिवारी, भिंड बीआरसी दशरथ सिंह कौरव, स्कूल संचालक राजेश शर्मा, राधेगोपाल यादव, अमित दुबे, विमलेश दुबे, उमा शर्मा, वाहन चालक रामनिवास श्रीवास्तव सहित कई लोग उपस्थित थे।

कलेक्टर बोले- बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं

स्कूल संचालक और वाहन संचालकों के खर्चों की बात पर कलेक्टर ने जवाब दिया कि बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो नियम बनाए गए हैं उनकी पूर्ति के लिए आरटीओ पूरा सहयोग करेंगी। लेकिन 15 साल पुराने वाहन, ओवर लोडिंग और गैस किट किसी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।

तीन दिन की हड़ताल से परेशान हो गए बच्चे

यहां बता दें कि पिछले दिनों स्कूल वाहनों में ओवर लोडिंग सहित शासन की ओर तय किए गए मापदंडों की पूर्ति के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाना शुरू कर दी है। हालांकि इसके लिए प्रशासन ने स्कूल संचालक और वाहन चालक परिचालकों की अलग अलग बैठक भी बुलाई थी। उन्हें नियमों की पूरी जानकारी देने के साथ उसकी पूर्ति के लिए समय दिया था। लेकिन स्कूली वाहनों में निर्धारित सीट के अलावा अन्य बच्चों को न बैठाने की बात वाहन संचालकों को हजम नहीं हुई। परिणामस्वरूप वे हड़ताल पर चले गए।

स्कूल और वाहन संचालकों ने गिनाए खर्चे, बोले-घाटा होगा

बैठक में स्कूल संचालकों ने बताया कि एक बस का महीने में पर 25 से 26 हजार रुपए खर्चा आता है। जबकि वह दो बार चक्कर लगाती है। वहीं जितने बच्चे बैठाकर लाए जा रहे हैं, उतने से यह पैसा बमुश्किल निकल पाता है। इसमें यदि बच्चों की संख्या घटा दी जाएगी तो उनका घाटा बढ़ जाएगा।

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